गढ़वा :
गढ़वा जिला बनने के साक्षी रहे लोगों ने सुनाए संस्मरण
जिले के प्रबुद्ध लोगों ने 'सपनों का गढ़वा' विषय पर रखे सुझाव
मंगलवार को सदर अनुमंडल कार्यालय सभा-कक्ष में गढ़वा जिला के स्थापना दिवस के अवसर पर 'सपनों का गढ़वा' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिले के प्रबुद्ध लोगों ने गढ़वा जिले के बनने के संस्मरणों एवं अब तक के परिवर्तनों पर विचार साझा किए। साथ ही, उन्होंने गढ़वा के भविष्य और विकास की संभावनाओं पर अपने सुझाव भी रखे। संगोष्ठी की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने की।
संगोष्ठी में डॉ. मुरली श्याम गुप्ता ने कहा कि वे ढिबरी युग में पैदा हुए थे, तब लैंपपोस्ट का दौर था, लेकिन समय के साथ गढ़वा ने विकास किया।
लायन सुशील केसरी ने कहा कि गढ़वा ने विकास किया है, लेकिन जलस्तर में गिरावट आई है। बालू उठाव पर रोक लगाने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की जरूरत है। शिक्षक अरुण दुबे ने शिक्षा को सर्वोच्च संसाधन बताते हुए कहा कि उनकी छात्रा नम्रता कुमारी भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंची हैं, जिससे गढ़वा को गर्व है।
समाजसेवी दयाशंकर गुप्ता ने कहा कि जिला बनने के बाद कई सपने पूरे हुए, लेकिन कुछ अधूरे हैं।
द्वारिका प्रसाद पांडेय ने कहा कि पहले गढ़वा में केवल आठ गाड़ियां चलती थीं, लेकिन अब परिवहन की कोई समस्या नहीं है। प्रमोद सोनी ने कला और संस्कृति के विकास पर बात करते हुए 'मेरा गढ़वा महान' गीत सुनाया। नीरज श्रीधर ने साहित्यिक मंच की स्थापना की आवश्यकता जताई।
अधिवक्ता अशोक पटवा ने शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति पर जोर दिया, जबकि इम्तियाज अंसारी ने सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की।
श्री बृजेश पांडेय ने गढ़वा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया, वहीं समाजसेवी शौकत खान ने गढ़वा को समाजसेवियों का गढ़ बताया। संगोष्ठी में आत्माराम पांडेय, इम्तियाज अंसारी, पूनम श्री आदि ने भी अपने विचार रखे।