गढ़वा : नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल कुमार पाण्डेय ने गढ़वा नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपायुक्त कार्यालय को पत्र लिखा है। उन्होंने नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के मामलों की गहन जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। श्री पाण्डेय ने विशेष रूप से नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अनिल कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया कि सुशील कुमार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने 11 महत्वपूर्ण मामलों की जांच की मांग की है, जिनमें प्रमुख रूप से अवैध वसूली, सरकारी योजनाओं में हेराफेरी, और निजी लाभ के लिए नगर परिषद के संसाधनों का दुरुपयोग शामिल है।
उन्होंने अपने पत्र में विस्तार से उल्लेख किया कि गढ़वा बस स्टैंड के दुकानों के आवंटन में 45 लाख की अवैध वसूली की गई है, और 60 दुकानों का आवंटन बाहरी लोगों को करके लगभग 2 करोड़ की वसूली की गई। श्री पाण्डेय ने कहा कि अंतरराज्यीय बस पड़ाव का नाम बदलकर पुनः "श्री कृष्ण बस पड़ाव" किया जाए।
उन्होंने आगे बताया कि बिना निविदा के 350 योजनाओं के निर्माण और मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा गढ़वा पदस्थापना के समय से ही अपने सगे भाई सुनिल कुमार सिह पिता बैद्यनाथ सिंह के नाम पर निबंधित गाड़ी नं0-1H05BT-4709 (निजी वाहन) में नगर परिषद् के पैसे से हमेशा डीजल भराते हैं, तथा प्रति सप्ताह अपने घर हजारीबाग भी जाते हैं साथ ही अपने निजी वाहन के चालक को नगर परिषद् से भुगतान करवाते हैं।
श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि पहले जब्त की गई अवैध प्लास्टिक को वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी ने आरोपी व्यक्तियों को पुनः सौंप दिया, और कचरा उठाव व डंपिंग के नाम पर निजी कंपनियों के साथ मिलकर हेराफेरी की गई है।
इसके साथ नागेन्द्र विश्वकर्मा जिसे पूर्व के अध्यक्ष के ड्राईवर के नाम पर भुगतान वर्तमान तक वर्ष किया जा रहा है जबकि डेढ़ वर्ष पूर्व ही उनका कार्यकाल पूरा हो गया है। तथा रीता पूर्ती एवं बबीता देवी को स्वीपर के नाम पर भुगतान किया जाता है जबकि ये लोग नगर परिषद् में स्वीपर का कार्य नहीं करते।
इसके अलावा, उन्होंने सोनपुरवा तालाब के सौंदर्यीकरण में लूट, फर्जी स्वीपरों को भुगतान, डस्टबिन की खरीद में गड़बड़ी, और शौचालय व जलमीनार में हुई मरम्मत में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग की है।
श्री पाण्डेय ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनके इस पत्र ने नगर परिषद के कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।