गढ़वा : कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती, झारखंड प्रांत द्वारा आयोजित “कला धरोहर यात्रा” का दूसरा चरण अत्यंत उत्साह और गरिमामय वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस चरण का शुभारंभ गढ़वा जिला मुख्यालय स्थित काली मंदिर से हुआ, जहाँ विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कला जत्था शिव पहाड़ी गुफा, भवनाथपुर की ओर रवाना हुआ।

यह यात्रा केवल एक सामान्य धार्मिक या सांस्कृतिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त अभियान बनकर उभरी। यात्रा में शामिल कलाकार, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता पूरे मार्ग में सांस्कृतिक चेतना का संदेश प्रसारित करते हुए आगे बढ़ते रहे।
गढ़वा जिला मुख्यालय में अवस्थित काली स्थान से प्रारंभ होकर यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए भवनाथपुर स्थित शिव पहाड़ी गुफा तक पहुँची। गुफा तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत दुर्गम और चुनौतीपूर्ण रहा। ऊबड़-खाबड़ पगडंडियां, सँकरे रास्ते और पहाड़ी चढ़ाई के बावजूद सभी प्रतिभागियों का उत्साह और दृढ़ संकल्प प्रेरणादायक रहा। गुफा के भीतर प्रवेश करते हुए कलाकारों ने कठिनाइयों को पार कर गर्भगृह तक पहुँचने का साहसिक प्रयास किया।
शिव पहाड़ी गुफा अपनी प्राचीनता, रहस्यमयी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।

इस अवसर पर गढ़वा जिले के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमेश चंचल ने कहा, “संस्कार भारती का पवित्र अभियान "कला धरोहर यात्रा" केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का एक गंभीर और सतत प्रयास है। ऐसी यात्राएँ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और उनमें अपनी परंपराओं के प्रति गर्व का भाव उत्पन्न करती हैं।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जिला सचिव प्रमोद कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारी सांस्कृतिक धरोहरें केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि यह हमारी आत्मा का हिस्सा हैं। इन्हें समझना, संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
संस्कार भारती, झारखंड प्रांत के कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने कहा, “कला धरोहर यात्रा का उद्देश्य केवल स्थलों का भ्रमण करना नहीं है, बल्कि उन स्थलों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को समझते हुए समाज में उसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पंच प्रण के एक अंश "विरासत पर गर्व" को केंद्र में रखते हुए ही कला धरोहर यात्रा का आयोजन संस्कार भारती राष्ट्रीय स्तर पर कर रही है।
संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के अध्यक्ष मदन प्रसाद केशरी ने कहा "संस्कार भारती के झारखंड प्रांत के कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर 'स्वर्गीय' के नेतृत्व में कला धरोहर यात्रा का शुभारम्भ गढ़वा से किया जाना हम सभींक लिए गर्व का विषय है। मैं समस्त जिले वासियों से आग्रह करता हूँ कि इस कला धरोहर यात्रा में सहयोग और स्नेह प्रदान कर अपनी संस्कृति को पोषित करने में सहयोग करें।"
संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के संरक्षक श्रवण शुक्ल ने कहा, “संस्कार भारती का मूल उद्देश्य कला, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करना है।
एसएसजेएस नामधारी महाविद्यालय, गढ़वा के प्रोफेसर भास्कर ने कहा "शिव पहाड़ी गुफा में वही आ पाएगा जिन्हें भोले नाथ बुलाएँगे।"
कला साधिका संध्या सुमन ने कहा, “ऐसी यात्राएँ कलाकारों को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती हैं। जब हम अपनी धरोहरों के बीच होते हैं, तो हमारी कला में स्वतः ही गहराई और संवेदनशीलता आ जाती है, जो समाज में सकारात्मक संदेश देने में सहायक होती है।”
गढ़वा जिला इकाई के रंगकर्मी कौस्तुभ ने कहा, “शिव पहाड़ी गुफा जैसे स्थलों तक पहुँचना केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने का पावन अवसर भी है।
इस अवसर पर लोक कलाकार अरविंद कुमार तिवारी, शिक्षक धर्मेंद्र कुमार पुष्कर, अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी, अधिवक्ता अमोद कुमार सिन्हा, ब्रजेश गुप्ता, सुनील कुमार, भानु प्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने यात्रा के उद्देश्य की सराहना करते हुए इसे निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
आयोजन को सफल बनाने में विजेंद्र तिवारी, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर विद्यालय परिवार, भवनाथपुर, जीएन कान्वेंट स्कूल, गढ़वा, रमण शादी कार्ड, श्रीबंशीधर नगर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। “कला धरोहर यात्रा” का यह दूसरा चरण न केवल सफल रहा, बल्कि इसने समाज में संस्कृति के प्रति जागरूकता, जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को भी नई दिशा प्रदान की।
यह यात्रा आने वाले समय में भी इसी तरह समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती रहेगी—इसी आशा और विश्वास के साथ इस पुनीत कार्यक्रम का समापन हुआ।