whatshot Developed by O2OSELL.COM favorite 28163817 readers visited
Advertisement
Loading...

Advertisement

जिस घर में नित्य हरि कीर्तन होता है, वहाँ कलियुग प्रवेश नहीं कर सकता - जीयर स्वामी

location_on बंशीधर नगर access_time 19-Oct-23, 06:50 PM visibility 680
Share



जिस घर में नित्य हरि कीर्तन होता है, वहाँ कलियुग प्रवेश नहीं कर सकता -  जीयर स्वामी


दिनेश पांडेय check_circle
संवाददाता



बंशीधर नगर : प्रखंड के पाल्हे जतपुरा ग्राम में चल रहे प्रवचन के दौरान श्री श्री जीयर स्वामी जी ने कहा कि जिसका जैसा भाव होता है, उसको वैसा ही फल मिलता है.सफेद कपड़े में थोड़ी भी स्याही का दाग पड़ने से वह दाग बहुत स्पष्ट दीखता है, उसी प्रकार पवित्र मनुष्यों का थोड़ा सा दोष भी अधिक दिखलायी देता है.जिस घर में नित्य हरि कीर्तन होता है, वहाँ कलियुग प्रवेश नहीं कर सकता.जब भगवान् के आश्रित हो रहे हो तो यह न हुआ, वह न हुआ आदि चिन्ताओं में मत पड़ो ,विश्वासी भक्त आजीवन भगवान्‌ का दर्शन न मिलकर भी भगवान् को नहीं छोड़ता. संसार कच्चा कुआँ है. इसके किनारे पर खूब सावधानी से खड़े होना चाहिये. तनिक असावधान होते ही कुएँमें गिर पड़ोगे, तब निकलना कठिन हो जायेगा.संसारी! तुम संसार का सब काम करो; किन्तु मन हर घड़ी संसारसे विमुख रखो,कामिनी और कञ्चन ही माया है. इनके आकर्षण में पड़नेपर जीवकी सब स्वाधीनता चली जाती है . इनके मोहके कारण ही जीव भव-बन्धन में पड़ जाता है.संसारमॆ रहनेसे सुख-दुःख रहेगा ही. ईश्वरकी बात अलग है और उसके चरण कमलमें मन लगाना और है. दुःखके हाथसे छुटकारा पाने का और कोई उपाय है नही.साधु-संग करने से जीव का मायारूपी नशा उतर जाता है .भगवान् का भजन ही जीवन का सुफल है.सुगम मार्गसे चलो और सुखसे राम-कृष्ण-हरिनाम लेते चलो. वैकुण्ठ का यही अच्छा हैऔर समीप का रास्ता .जिस सङ्गसे भगवत् प्रेम उदय होता है वही सङ्ग सङ्ग है, बाकी तो नरक निवास.संतो के द्वारपर श्वान होकर पड़े रहना भी बड़ा भाग्य है, क्योंकि वहाँ प्रसाद मिलता है और भगवान् का गुणगान सुननेमें आता है.कीर्तन का अधिकार सबको है, इसमें वर्ण या आश्रम का भेद-भाव नहीं.कीर्तन से शरीर हरिरूप हो जाता है. प्रेमछन्दसे नाचो डोलो. इससे देहभाव मिट जायगा.हरिकीर्तनमें भगवान्, भक्त और नामका त्रिवेणी संगम होता है.प्रेमी भक्त प्रेमसे जहाँ हरिगुण-गान करते हैं, भगवान् वहाँ रहते ही हैं. तो कीर्तन से संसारका दुःख दूर होता है. कीर्तन संसारके चारों ओर आनन्दकी प्राचीर खड़ी कर देता है और सारा संसार महासुखसे भर जाता है . कीर्तन से विश्व धवलित होता और वैकुण्ठ पृथ्वीपर आता है.भगवान के वचन हैं — मेरे भक्त जहाँ प्रेमसे मेरा नामसंकीर्तन करते हैं, वहाँ तो मैं रहता ही हूँ — मैं और कहीं न मिलूँ तो मुझे वहीं ढूँढ़ो . तेरा कीर्तन छोड़ मैं और कोई काम न करूँगा. लज्जा छोड़कर तेरे रंगमें नाचूँगा. कीर्तन का विक्रय महान् मूर्खता है.वाणी ऐसी निकले कि हरिकी मूर्ति और हरिका प्रेम चित्तमें बैठ जाय. वैराग्य के साधन बतावे, भक्ति और प्रेमके सिवा अन्य व्यर्थकी बातें कथा में न कहे .कीर्तन करते हुए हृदय खोलकर कीर्तन करे, कुछ छिपाकर- चुराकर न रखे. कीर्तन करने खड़े होकर जो कोई अपनी देह चुरावेगा, उसके बराबर मूर्ख और कौन हो सकता है.स्वाँग से हृदयस्थ नारायण नहीं ठगे जाते.निर्मल भाव ही साधन-वन का बसन्त है.भगवान् भावुकोंके हाथपर दिखायी देते हैं, पर जो अपनेको बुद्धिमान् मानते हैं, वह मर जाते हैं तो भी भगवान् का पता नहीं पाते.ज्ञान के नेत्र खुलनेसे ग्रन्थ समझमें आता है, उसका रहस्य खुलता है, पर भावके बिना ज्ञान अपना नहीं होता. भावके नेत्र जहाँ खुले वहीं सारा विश्व कुछ निराला ही दिखायी देने लगता है.भगवान से मिलन होनेके लिये भाव आवश्यक है.चित्त यदि भगवच्चिन्तनमें रँग जाय तो वह चित्त ही चैतन्य हो जाता है, पर चित्त शुद्ध भावसे रँग जाय तब. जैसा भाव वैसा फल.भगवान्‌ के सामने और कोई बल नहीं चलता .पत्थर की ही सीढ़ी और पत्थरकी ही देव-प्रतिमा, परंतु एक पर हम पैर रखते हैं और दूसरेकी पूजा करते हैं. भाव ही भगवान् हैं.गङ्गा-जल जल नहीं है, बड़-पीपल वृक्ष नहीं हैं, तुलसी और रुद्राक्ष माला नहीं है, ये सब भगवान्‌के श्रेष्ठ शरीर हैं .भाव न हो तो साधनका कोई विशेष मूल्य नहीं .
Advertisement


Advertisement
Advertisement


Trending News

#1
कोरवाडीह पंचायत के रोजगार सेवक को 5000 रुपये की घूस लेते एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा

location_on गढ़वा
access_time 23-Apr-25, 12:21 PM

#2
पर्यावरण हितैषी सामग्रियों से ही बनें पूजा की प्रतिमाएँ : नीरज श्रीधर स्वर्गीय

location_on गढ़वा
access_time 21-Sep-26, 11:43 AM

#3
51वें साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा-पाठ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

location_on गढ़वा
access_time 23-Sep-26, 04:22 PM

#4
इंदिरा गांधी रोड पर युवक को गोली मारकर घायल किया गया

location_on गढ़वा
access_time 30-Jun-25, 08:41 PM

#5
सफलता पाने के लिए मेहनत, धैर्य और समर्पण की होती है आवश्यकता : छाया

location_on गढ़वा
access_time 28-Apr-25, 05:01 PM


Latest News

51वें साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा-पाठ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

location_on गढ़वा
access_time 23-Sep-26, 04:22 PM

श्रीजानकी बाग में आज होगा 51वाँ श्रीहनुमान चालीसा-पाठ और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चर्चा भी

location_on गढ़वा
access_time 22-Sep-26, 03:57 PM

पर्यावरण हितैषी सामग्रियों से ही बनें पूजा की प्रतिमाएँ : नीरज श्रीधर स्वर्गीय

location_on गढ़वा
access_time 21-Sep-26, 11:43 AM

प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर बलिदानियों को सादर समर्पित तिलक करो इस मिट्टी से... कार्यक्रम सम्पन्न

location_on गढ़वा
access_time 13-May-26, 11:02 AM

गढ़वा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई का गठन, कवि सम्मेलन में गूंजे राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकार के स्वर

location_on गढ़वा
access_time 15-Apr-26, 03:50 PM

कला धरोहर यात्रा का दूसरा चरण संपन्न, शिव पहाड़ी गुफा तक पहुँचा कला जत्था

location_on गढ़वा
access_time 07-Apr-26, 10:56 AM

गढ़वा के परिहारा गाँव में साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ का शुभारंभ, संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

location_on गढ़वा
access_time 01-Apr-26, 11:29 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 02:27 PM

संगीत शिक्षक आनन्द कुमार चौबे को मिला उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान

location_on गढ़वा
access_time 30-Mar-26, 09:48 AM

विराट हिन्दू सम्मेलन में कला साधिका संध्या सुमन का शौर्य प्रदर्शन

location_on गढ़वा
access_time 15-Mar-26, 11:29 PM

o2osell.com का एप गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें।
Get it on Google Play