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सोशल एक्टिविस्ट ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर झारखंड के बदहाल स्कूली व्यवस्था को सुदृढ़ करने का किया मांग

location_on गढ़वा access_time 18-Sep-23, 04:40 PM visibility 697
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सोशल एक्टिविस्ट  ने  मुख्य सचिव को पत्र लिखकर झारखंड के बदहाल स्कूली व्यवस्था को सुदृढ़ करने का   किया  मांग


संजय कुमार यादव check_circle
संवाददाता



गढ़वा : सोशल एक्टिविस्ट पंकज यादव ने राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखकर झारखंड के बदहाल स्कूली व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निवेदन किया है ।साथ ही उसकी प्रतिलिपि राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री व राज्यपाल को भेजा है। पंकज यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि मैं झारखंड का मूल निवासी हूं तथा सोशल एक्टिविस्ट हूं .झारखंड में जनहित मामले को लेकर पिछले एक दशक से कार्य कर रहा हूं. मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान झारखंड में ध्वस्त हो चुके सरकारी स्कूल व्यवस्था की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूं .झारखंड के 35000 से अधिक सरकारी स्कूलों के हालात बिगड़ चुके हैं . झारखंड के सरकारी स्कूलों में पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक 50 लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में अध्यनरत हैं ।
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कुल विद्यार्थियों में से 95% अधिक विद्यार्थी एसटी, एससी, ओबीसी समाज के पढ़ते हैं। और 36000 स्कूलों में से 16000 से अधिक स्कूल एक या दो शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे है। प्राथमिक विद्यालयों में 50% शिक्षकों के पद खाली हैं तथा माध्यमिक स्कूलों में 42% सीट शिक्षकों के रिक्त हैं वहीं उच्च शिक्षा तथा इंटर स्कूलों में 55.61% शिक्षकों के पद खाली हैं। पंकज का कहना है कि क्वालिटी एजुकेशन तो दूर सरकारी स्कूल में पढ़ रहे एसटी, एससी, ओबीसी कैटिगरी के पांचवी क्लास तक के बच्चे इंग्लिश में रीडिंग तक नहीं मार पाते हैं। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं इसका परिणाम यह है कि 15 लाख बच्चे प्रतिदिन सरकारी स्कूलों में अनुपस्थित रहते हैं ।
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और सरकार के लाख प्रयास के बावजूद भी दिनों दिन स्कूलों में नामांकन की संख्या घटती जा रही है । शिक्षा विभाग ने 4481 स्कूलों को जर्जर घोषित किया है। सैकड़ो स्कूलों में बच्चे बरामदे में , खुली आसमान में तथा टेंट में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का किल्लत इतना है कि झारखंड के कई स्कूलों में पहले से दसवीं तक छात्रों का नामांकन तो जरूर होता है पर वहां दो से तीन कमरों में स्कूल का संचालन होता है। एक से आठवीं क्लास तक के बच्चे एक ही शिक्षक के द्वारा एक ही क्लासरूम में पढ़ रहे हैं झारखंड के सैकड़ों स्कूलों में इंग्लिश , गणित तथा विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं और उन स्कूलों से हजारों विद्यार्थी प्रतिवर्ष इंग्लिश, गणित और विज्ञान की पढ़ाई कर मैट्रिक की परीक्षा पास कर रहे हैं।
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सिर्फ सर्टिफिकेट लेकर मैट्रिक की परीक्षा पास कर रहे झारखंड के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य कैसा होगा उसकी आप कल्पना मात्र कर सकते हैं। पंकज ने अपने पत्र में लिखा है कि यह सारी कुव्यवस्था एक आदिवासी राज्य में हो रहा है जहां पर 25% से अधिक आदिवासी तथा 10% से अधिक दलित व 50% से अधिक पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं। किताबों की समस्या से अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि सितंबर महीने के आधे बीत जाने के बाद भी 5 लाख से अधिक बच्चों को पुस्तक नहीं मिल पाई हैं। पिछले तीन वर्षों से आठवीं पास विद्यार्थियों को साइकिल नहीं मिल पा रही है। राज्य के 90% स्कूलों में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था नहीं है साथ ही बरसात के दिनों में वज्रपात से बचने के लिए स्कूलों में तड़ित चालक नहीं है।
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प्रतिदिन कहीं ना कहीं से छोटे-मोटे हादसे की खबर आती रहती है। 14 सितंबर को पलामू की हरिहरगंज स्थित विद्यालय के समीप वज्रपात होने से सात छात्राएं बेहोश हो गई थी। इसी महीने पलामू में ही एक स्कूल में वज्रपात होने से एक बच्चे की मौत हो गई थी । झारखंड की सरकारी स्कूलों की दशा, अवस्था और स्थिति बहुत ही बदहाल व गंभीर है । उन्होंने यह बात दावे के साथ कहा कि झारखंड के सरकारी स्कूलों में 95% से अधिक एसटी ,एससी और पिछड़े वर्ग के बच्चों के पढ़ने के कारण सरकार व अधिकार सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे पाते। पिछड़े, दलित व आदिवासियों में जागरूकता का घोर अभाव है तथा राज्य के नेता ,मंत्री व विधायक स्कूली व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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इस कारण खराब स्कूली व्यवस्था के खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठाता है। पंकज ने पत्र में आगे लिखा है कि वर्तमान में झारखंड राज्य में 50 लाख से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में अध्यनरत हैं, और जो कुव्यवस्था व गुणवत्ता रहित शिक्षा झारखंड के नौनिहालों को दी जा रही है वह निश्चय ही बेरोजगारी वह हताशा बढ़ाने वाली शिक्षा है। शिक्षा के सुधार के लिए कई वर्षों से संघर्षरत होने की बात उन्होंने कही है तथा इसकी सुधार के लिए अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का दावा भी उन्होंने किया है। उन्होंने आगे लिखा है झारखंड में खराब स्कूली शिक्षा व्यवस्था का खामियाजा 48 लाख एसटी ,एससी ,ओबीसी के बच्चे भुगतेंगे इसलिए इस बात को राष्ट्रीय एसटी - एससी और ओबीसी आयोग के संज्ञान में लाने की कोशिश की है ताकि आयोग के अध्यक्षों द्वारा भी इस ओर ध्यान दिया जाए।
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पंकज ने जल्द से जल्द 90000 से अधिक खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरे जाने का निवेदन तथा 4481 से अधिक जर्जर सरकारी स्कूलों को दुरुस्त करने का निवेदन मुख्य सचिव से किया है तथा शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा मुहैया कराया जाए ।
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