गढ़वा :
झारखंड राज्य के सबसे बड़े छठ मेले में इस वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी यहां झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ बिहार मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु गढ़वा में लगने वाले इस छठ मेले का दीदार करने पहुंचे। ऐसा कहें की कोरोना काल के बाद शायद ही कहीं ऐसी भीड़ गढ़वा जिले में देखने को मिली है तो अन्यथा नहीं होगा ।लोगों ने कोरोना से बेपरवाह होकर जमकर मेले का लुफ्त उठाया।
दरअसल 4 दिनों के छठ व्रत में जिला मुख्यालय गढ़वा से होकर गुजरने वाली दानरो नदी कि रूप सज्जा इस कदर बदल जाती है कि छठ मेले के दो-तीन दिन बाद पहचान पाना मुश्किल है कि क्या इसी नदी में ऐसा झारखंड का विशाल व आकर्षक छठ मेला लगता है? जिसमें विभिन्न राज्यों से छठ व्रतियों के साथ श्रद्धालु छठ मेले में घूमने आते हैं ।
स्वाभाविक रूप से श्रद्धालुओं का छठ मेले के प्रति आकर्षण का कुछ न कुछ कारण तो रहता ही होगा, वरना छठ की इस मौके पर जब तमाम जलाशयों गांव छठ पूजा होता है तथा ठंड का मौसम हो बावजूद लोग यहां छोटे-छोटे बच्चों महिलाओं के साथ क्यों घूमने आते हैं। इसे ध्यान में रखकर यदि जिला मुख्यालय गढ़वा में लगने वाले दानरो नदी छठ मेले का आकलन करें तो शायद ही एकीकृत बिहार में भी ऐसा कोई छठ मेला होगा जहां के घाट पर कई स्थाई खूबसूरत वाच टावर विभिन्न क्लबों के नाम पर बने हुए हैं , यहां सिर्फ आकर्षक सजावट हीं घाटों का नहीं होता है बल्कि खाने-पीने सजने सवरने से लेकर कई ऐसी महत्वपूर्ण लोगों की आम जिंदगी से जुड़ी चीजों के साथ साथ आकर्षक वस्तुओं की खरीद बिक्री भी इस मेले में होता है ।
चाहे बच्चों का आकर्षक खिलौने हो अथवा महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़े सामग्री सभी इस छठ मेले में घाटों पर ही एक ही दिन के लिए सही परंतु उपलब्ध रहता है। यहां श्रद्धालु यदि जीवंत तस्वीर खिंचवा सकते हैं तो उन्हें बच्चों को बहलाने के लिए एक से एक अनोखे खिलौने की खरीदारी करने में भी आनंद आता है । इतना ही नहीं छठ मेले की खूबी है कि अपने मेहमानों को भी इस छठ घाट पर लजीज बड़े बाजारों की तरह व्यंजन का नाश्ता जलपान चाय पकौड़ा सारा कुछ करा सकते हैं। कुल मिलाकर जिला मुख्यालय गढ़वा के दानरो नदी में लगने वाले इस मेले कि कई खूबियां हैं इन खूबियों को मुकाम तक पहुंचाने के पीछे वर्षों से कार्यरत कई महत्वपूर्ण स्वयंसेवी संगठन यहां काम करती हैं जो बड़े ही भक्ति भाव से आम सहयोग से छठ घाट पर भगवान का आकर्षक पंडाल से लेकर फूल की सजावट बेहतरीन साफ-सफाई, रंग बिरंगे, लाइट छठ व्रतियों के लिए दूध ,स्नानागार जो भी महत्वपूर्ण आवश्यकताएं होती हैं उसे पवित्रता और बड़े ही सम्मान के साथ उपलब्ध कराते हैं ।
इस छठ घाट की विशेषता है कि यहां कोई भी व्रति किसी भी हालत में क्यों न पहुंच जाए उसे विभिन्न क्लबों से जुड़े सदस्यों द्वारा हर संभव छठ महापर्व में सहयोग किया जाता है परस्पर सहयोग की ऐसी भावना बहुत कम मेले में देखने को मिलता है।
जिला मुख्यालय से जुड़े इस छठ मेले की एक बड़ी महिमा है यह भी है कि जहां छोटी-छोटी भीड़ में भी लूटपाट महिलाओं की चैन स्नैचिंग जैसी घटनाएं आम रहती है, मगर यहां वर्षों से हजारों की भीड़ छठ के मौके पर लगता है परंतु ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं । कहा जाता है इस मेले में जो भी व्यक्ति खराब नियत से प्रवेश करेगा उसकी नियत बदल जाती है तथा छठ मैया के महिमा के आगे नतमस्तक होकर एक श्रद्धालु की तरह मेले में अपने आप में तब्दील करने को मां की महिमा के कारण मजबूर हो जाता है यही कारण है कि यहां किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटती है।
इस मेले की महिमा का आकलन और महत्व और इससे भी लगा सकते हैं की यहां स्थानीय मंत्री हो अथवा किसी भी पार्टी से जुड़े नेता बगैर इस मेले में दस्तक दिए उनकी राजनीति नहीं चल सकती है।