पलामू : मजदूर किसान महाविद्यालय डंडार कला पांकी में आज वैश्विक महामारी कोरोना के परिदृश्य में "कोविड-19 का उच्च शिक्षा प्रणाली पर प्रभाव" विषय पर वेमिनार आयोजित किया गया इस सेमिनार में ऑनलाइन शामिल हुए वक्ताओं ने इस वैश्विक महामारी कोरोना से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पड़े प्रभाव को सकारात्मक दिशा में देखते हुए कहा कि दरअसल वैश्वीकरण के इस युग में कोविड-19 का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक क्रांति आया है, क्योंकि लोग अब यह महसूस करने लगे हैं कि पाठ्यक्रम को सिर्फ आमने-सामने बैठकर ही छात्र-छात्राओं तक अध्ययन अध्यापन नहीं कराया जा सकता बल्कि बदले परिस्थिति में ऑनलाइन पाठ्यक्रम के जरिए छात्र छात्राओं को जोड़कर शिक्षा का बेहतर अवसर दीर्घकाल तक शोध और सामग्री संग्रहित करने के मामले में प्रदान किया जा सकता है।
साथ ही वक्ताओं ने एक स्वर से माना की कोविड-19 के प्रभाव को अवसर में बदलने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाने की जरूरत है ताकि बदले परिस्थिति में भी उच्च शिक्षा निर्बाध गति से चलती रहे।
मजदूर किसान महाविद्यालय पाकी के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस सेमिनार का उद्घाटन कालेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रेमचंद महतो के द्वारा ऑनलाइन किया गया, जबकि कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जनता शिवरात्रि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राणा प्रताप सिंह एवं विशिष्ट अतिथि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के रूसा सेल की डॉक्टर विभा पांडे ने अपने अपने विचार रखें। इस मौके पर पूर्व कुलपति डॉ केएन दुबे, विनोवा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएस कुशवाहा, पूर्व कुलपति डॉ रागिनी त्रिपाठी तथा डॉ एसएस झा जैसे वक्ताओं ने अपने विशिष्ट विचार रखते हुए माना कि कोविड-19 उच्च शिक्षा पर पड़ रहे प्रभाव को बेहतर अवसर में बदलने की जरूरत है कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सुल्ताना परवीन ने किया।