झारखंड का पहला वेद व्यास मंदिर में हुआ प्रतिमा का अनावरण
पर्यटक स्थल के रूप विकसित होने से मिलेगा रोजगार : डॉ कुलदेव
उंटारी रोड: महर्षि वेद व्यास परिषद उंटारी रोड प्रखंड इकाई के तत्वाधान में जोगा पंचायत के बिरजा गांव में भगवान महर्षि वेद व्यास जी की जयंती पूजा अर्चना के साथ मनाई गई। समिति अध्यक्ष राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि लॉकडाउन और कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए सीमित लोगों द्वारा जयंती मनाई गई। जबकि इस वर्ष महर्षि वेद व्यास मंदिर बनकर तैयार था और भव्य आयोजन कर वेद व्यास जी प्रतिमा की स्थापना भी किया जाना था। परन्तु सरकार के निर्देशानुसार सीमित लोगों के बीच प्रतिमा स्थापित की गई। अतिथि के रूप में पहुंचे महर्षि वेद व्यास परिषद विद्वत प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सह युवा समाजसेवी डॉ कुलदेव चौधरी ने कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है।
इसी दिन चारों वेद व महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। वेदों की रचना करने के कारण इन्हें वेद व्यास भी कहा जाता है। वेद व्यास के सम्मान में ही आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। अब लोग व्यास पूर्णिमा से भी जानना शुरू करने लगे हैं। डॉ चौधरी ने कहा कि शिक्षा और संस्कार को जानना बहुत जरूरी है। पूजा-पाठ, अध्यात्म हमें संस्कार सिखाता है और शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत करता है। वहीं शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है। शिक्षा सीखने की एक प्रक्रिया है। यह किसी भी वस्तु या परिस्थिति को आसानी से समझने, किसी भी तरह की समस्या से निपटने और पूरे जीवन भर विभिन्न आयामों में संतुलन बनाये रखने में हमारी सहायता करती है।
शिक्षा सभी मनुष्यों का सबसे पहला और आवश्यक अधिकार है। यह स्पष्ट है कि शिक्षा वह अंधकार मिटाने का सशक्त माध्यम है जिससे व्यक्ति, परिवार तथा समाज का चहुँमुखी विकास होता है। आज विद्वता के आधार पर ही महर्षि वेद व्यास जी को विश्व गुरु माना जाता है। आज संकल्प लेने का दिन होता है कि समाज और देश हित में कुछ ऐसा कार्य करें जो आनेवाली पीढ़ी सदा याद करे। डॉ चौधरी ने यह भी कहा कि बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशाखोरी, जुआ, चोरी जैसे कई समस्या है जो समाज को खोखला कर दिया है। ऐसा नहीं कि यह समस्या केवल निषाद समाज का है बल्कि इससे कोई जाति अछूता नहीं है। इसे सभी को मिलकर किसी भी हर हाल में मिटाना ही होगा तभी समाज का विकास संभव है। जहां तक रोजगार की बात है तो झारखंड का पहला वेद व्यास मंदिर होने के कारण पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यहाँ के लोगों को रोजगार मिल पायेगा।
कोरोना काल में जो मजदूर वापस घर आये हैं उनसे कहना चाहता हूं कि आपकी प्रतिभा ही है जो किसी दूसरे राज्य में काम दिलाता है। अगर मोमबत्ती, अगरबती, मशरूम, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन आदि के छोटे-छोटे उधोग लगाए जाएं तो आपकी प्रतिभा के बदौलत उत्पादन बढ़ेगा और आसानी से यहीं रोजगार मिलना शुरू हो जायेगा। अध्यक्षता राम प्रसाद चौधरी एवं संचालन रमेश चौधरी ने किया। मौके पर शिक्षक लालबिहारी चौधरी, संजय चौधरी, कमलेश चौधरी, मोतीलाल चौधरी, काशीनाथ चौधरी, सुखदेव चौधरी, अमित कुमार, उदित चौधरी आदि उपस्थित थे।