गढ़वा : गढ़वा शहर के करीब दानरो नदी के तट पर स्थित जुड़वनियां शिव मंदिर में सावन मास की पहली सोमवारी को पूरे दिन ताला लटका रहा। श्रद्धालु मंदिर तक आए जरूर लेकिन मंदिर में ताला लटका होने के कारण निराश होकर उन्हें वापस जाना पड़ा। प्रशासन की सख्ती के कारण श्रावण महोत्सव 2020 की शुरुआत भी नहीं हो सकी। मंदिर के पुरोहित ने सुबह में अकेले ही भगवान भोले शंकर की पूजा कर श्रावण के पहले सोमवार की शुरुआत की। इसके बाद पुरोहित मंदिर के मुख्य गेट को बंद कर बाहर बैठकर लोगों को वापस अपने घर जाकर पूजा करने का आग्रह करते रहे।
इस बीच आज अहले सुबह जिला प्रशासन के द्वारा नियुक्त दंडाधिकारी के द्वारा जुड़वनियां शिव मंदिर का निरीक्षण किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित गढ़वा के प्रखंड विकास पदाधिकारी जागो महतो व इंस्पेक्टर सह थाना प्रभारी लक्ष्मीकांत ने कहा कि वरीय पदाधिकारियों के निर्देश के आलोक में वे लोग मंदिरों के निरीक्षण के लिए निकले हैं। कोरोना संक्रमण काल में मंदिरों में किसी भी तरह की पूजा अर्चना लोगों के लिए बंद है। ऐसे में प्रशासन को जुड़वनियां मंदिर पर श्रावण महोत्सव 2020 के शुरू किए जाने की सूचना मिली थी। लेकिन यहां आने के बाद समिति के लोगों की जागरूकता को देखकर वे संतुष्ट हुए। उन्होंने कहा कि वे गढ़वा प्रखंड के सभी मुखिया को इसकी जिम्मेवारी दिए हैं कि कहीं भी मंदिर में पूजा न हो। उन्होंने कहा कि मंदिर पूरी तरह से बंद है और मंदिर के पुरोहित श्रद्धालुओं को आग्रह पूर्वक अपने घरों में भगवान भोले शंकर की आराधना की अपील कर रहे हैं।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पिंटू चौबे ने कहा कि समिति पूरी तरह से राज्य सरकार व जिला प्रशासन के गाइडलाइन के अनुसार मंदिर में पूजा अर्चना करेगा। इसी उद्देश्य आज पूरे दिन मंदिर में ताला लटका रहा। मंदिर के पुरोहित के अलावे समिति के पदाधिकारी भी समय-समय पर मंदिर पर पहुंचकर इसकी निगरानी करते रहे।
निराश और हताश थे श्रद्धालु : आज श्रावण मास के पहली सोमवारी को मंदिरों के पट पर ताला लटके होने के कारण श्रद्धालु काफी निराश व हताश दिखे। श्रद्धालुओं का कहना था कि बाजारे खुल गए, आवागमन शुरू हो गया, ऑफिस में काम शुरू हो गया, बाजार में भीड़ बढ़ गए, सब कुछ सामान्य हो गया, लेकिन अभी तक मंदिरों के पट नहीं खुले। इसके कारण उनकी आस्था पर चोट पहुंच रहा है।
उन लोगों को कोरोना संक्रमण की विभीषिका का अंदाजा है। लेकिन प्रशासन को गाइडलाइन जारी कर मंदिरों में भी पूजा अर्चना शुरू करनी चाहिए। लोग निराश होकर बिना पूजा किए मंदिर से वापस जा रहे हैं यह अच्छी बात नहीं है।
कोरोना संकट से प्रभावित रहे शिव मंदिर
बंशीधर नगर में पुजारियों ने ही किया सिर्फ पूजा अर्चना
इतिहास में पहली दफा आम श्रद्धालुओं ने नहीं किया पूजा, बाहर से किए दर्शन
बंशीधर नगर : कोरोना महामारी के कारण अनुमण्डल मुख्यालय सहित आस पास के क्षेत्रों में स्थित शिवालयों में मंदिर के पुजारियों द्वारा ही भगवान शिव की पूजा अर्चना किया गया।श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के दरवाजे बंद रहे। श्रद्धालु अपने अपने घरों में ही बड़ी श्रद्धा व भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना किये।
सोमवारी को लेकर शिवालयों में लगने वाली भीड़ नहीं दिखी। श्रद्धालु कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करते हुए भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए मंदिर नहीं गये।
राजा पहाड़ी स्थित शिव मंदिर में श्रावण मास की प्रथम सोमवारी को गढ़वा जिला के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश्वर मणि, उनकी पत्नी मंजू मणि ने सपरिवार भगवान शिव की पूजा अर्चना किया। मंदिर के पुजारी गोपाल पाठक ने वैदिक मंत्रोचार साथ श्री नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग का विधिवत पूजा अर्चना, रुद्राभिषेक व आरती कराया। जलाभिषेक के लिए राजा पहाड़ी शिव मंदिर, पंचमुखी शिव मंदिर, पाल्हे कला में ओंकारेश्वर महादेव मंदिर, बगीचा शिव मंदिर, आशुतोष महादेव मंदिर, शिव मंदिर उसका कला, शिव मंदिर भोजपुर, प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित शिव मंदिर, वन कार्यालय परिसर स्थित शिव मंदिर, हेन्हों मोड़ स्थित शिव मंदिर, बिलासपुर शिव मंदिर, सहित सभी गांवो में स्थित शिवालयों में श्रद्धालुओं की लगने वाली भीड़ नहीं लगी।
इधर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि प्रत्येक शिवालयों में पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं, ताकि कोई भी मंदिर में जा ना सके बाहर से ही दर्शन करें और घर जाए।
कई जगहों पर प्रशासन की सख्ती के बाद भी मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु :
मझिआंव में श्रद्धालुओं ने नदियों से कलश भरकर शिवालयों में किया पूजा अर्चना
मझीआंव : सावन के पवित्र महीना के शुरुआती दौर में सोमवार के पहला दिन काफी संख्या में महिला पुरुष एवं बच्चे तथा कुंवारी कन्याए श्रद्धालुओं ने स्थानीय कोयल नदी व बांकी नदी के संगम से कलश में जल भरकर ब्लॉक रोड स्थित शिव मंदिर, खजूरी शिव मंदिर समेत कई शिवालयों में स्थापित बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
ज्ञात हो कि सुबह श्रद्धालुओं ने स्थानीय कोयल नदी और बांकी नदी में स्नान करने के पश्चात शिव मंदिर में स्थापित बाबा भोलेनाथ पर दूध, बेलपत्र, धतूरा, नारियल, सुपारी, फल - फूल के साथ जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने पांव पैदल यात्रा कर नदियों से वैदिक मंत्रोच्चारण के पश्चात जल उठाया था। इसके पश्चात जलाभिषेक किया। इधर भगवान शिव की आराधना करने से उसकी सभी तरह की मनोकामना सावन की पवित्र महीने में बाबा भोले शंकर जरूर पूरी करते हैं। वहीं बरस रहे रिमझिम बरसात एवं कोरोना वायरस महामारी के बावजूद भी श्रद्धालुओं का बाबा भोलेनाथ पर आस्था भारी पड़ा।
सगमा में श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा निकालकर भगवान शिव किया जलाभिषेक
सावन सोमवारी के पहले दिन श्रद्धालुओं ने शिवालयों में की जलाभिषेक
शिवालय में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सगमा : सावन सोमवारी के पहले दिन श्रद्धालुओं ने गांजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाल कर शिवालयों में जलाभिषेक किया श्रद्धालुओं ने नागराज शिव मंदिर से गाजा बाजा के साथ कलश यात्रा निकालकर बलहा जलाशय योजना से वैदिक मंत्रोचार के साथ कलश में जल भरकर नागराज शिव मंदिर में जलाभिषेक किये।
इस वर्ष सावन का पहला दिन सोमवारी से ही शुरू हुआ वह समाप्त भी सोमवारी को ही होगा। इसलिए श्रद्धालुओं के लिए यह वर्ष काफी माने रखता है। हालांकि लॉकडाउन के कारण प्रखंड मुख्यालय सहित गांव कस्बे के शिवालयों में भी श्रद्धालुओं ने सरकार के निर्देश को पालन करते हुए सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करते हुए शिवालयों में पूजा पाठ की। अधिकांश श्रद्धालु अपने अपने घरों में ही भगवान शिव की आराधना में लीन दिखे। हालांकि कोरोना वायरस जैसी संक्रमण बीमारी को लेकर इस वर्ष मंदिरों में पूजा पाठ करने की इजाजत सरकार द्वारा नहीं मिलने से सावन महीने के पहले सोमवार को भले ही मंदिरों में घंटे की गुंज व श्रद्धालु का जयकारा सुनाई नहीं दिया। मगर गांव कस्बे की अधिकांश घरों में लोग भगवान शिव के भक्ति में मगन दिखे।