गढ़वा : स्थानीय नामधारी महाविद्यालय अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग के सोशियोलॉजी सेमेस्टर 2 के इंटरनल परीक्षा में डॉ. बीरेंद्र यादव द्वारा छात्रों से 150 रुपया प्रति छात्र सेमिनार के नाम पर लिया गया।जब छात्रों ने पैसा देने से मना किया तो उन्होंने फेल करने एवं परीक्षा में अनुपस्थित करने का धमकी दिया। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों द्वारा विरोध करने पर उन्होंने कहा कि हमने पैसा नहीं लिया है। पर छात्रों ने बताया कि पैसा धमकी दे कर वसूली किया गया है। विरोध करने पर परिषद के पदाधिकारियों को देख लेने की धमकी देने लगे। तत्काल परिषद के पदाधिकारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने एवं हल्ला-हंगामा करने पर सारा पैसा विद्यार्थियों को पकड़ाकर महाविद्यालय से भाग खड़े हुए।
परिषद के विभाग संयोजक निशांत चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे शिक्षकों को पर तत्काल कारवाई करे एवं उन्होंने निलंबित करने का कार्य करे। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शशांक चौबे ने कहा कि यह कैंपस में भी सप्ताह के 4 दिन गायब रहते हैं एवं आकर अपनी सारी उपस्थिति एक साथ बनाते हैं। महाविद्यालय में लगातार छात्रों के लिए जाति वाचक शब्द का उपयोग करते हैं।पूर्व में भी इन्होंने सेमेस्टर इंटरनल परीक्षा में अवैध वसूली की है। अगर विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ की किसी प्रकार का भविष्य में प्रताड़ित करने की घटना घटती है तो ठीक बात नहीं है। जिला संयोजक मंजूल शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय तत्काल इन्हें सिंडिकेट सदस्य से हटाए एवं तत्काल कारवाई करे नही तो परिषद उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।
इस प्रकार की अवैध वसूली तत्काल छात्रों से बंद होनी चाहिए।
छात्र छात्राएं सरिता कुमारी, खुशबू कुमारी, श्वेता कुमारी, किरण कुमारी, विणा कुमारी, रेशमा मिंज, लकी कुमार, ऐमन सिद्धकी, सम्मा प्रवीण, प्रिया सिंह, सहित 103 प्रति छात्र 150 रुपये लिया गया था।
जब इस संबंध में प्रोफेसर डॉक्टर वीरेंद्र यादव से पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि हां हम सेमिनार के नाम पर छात्र-छात्राओं से पैसा लिए हैं। लेकिन हम पैसा लौटा रहे हैं। जबकि इस संबंध में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर अखिलानंद पांडे ने कहा कि सोशलॉजी विभाग मेरे कॉलेज के अधीन नहीं है लेकिन हमारे कैंपस में यह विभाग चलता है और इस तरह का घटना हो रहा है, जिससे यहां का माहौल भी इस कारण खराब हो रहा है।
हम विभागाध्यक्ष के खिलाफ शोकॉज निकालेंगे तथा विश्वविद्यालय को उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखेंगे।