गढ़वा : गढ़वा नगर परिषद से सटा हुआ उड़सुगी पंचायत आज भी विकास से कोसों दूर है। इस पंचायत में मुखिया का सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।
इस पंचायत के मुखिया अखिलेश उरांव बताते हैं कि हमने अपने पंचायत में पंचायत भवन बनवाने के लिए कई बार उपायुक्त सहित वरीय पदाधिकारियों को चिट्ठी लिखा है। यहां 19 लाख से बन रहे पंचायत भवन अधूरा पड़ा हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन में कोई कुछ सुनने वाला नहीं है। हमारा पंचायत अति पिछड़ा पंचायत है। यहां की कुल जनसंख्या 6421 है जबकि 3800 वोटर हैं।
मुखिया अखिलेश उरांव बताते हैं कि हमने फिर भी अपने पंचायत में कई विकास का कार्य किए हैं जिसमें करीब 12 सौ लाभुकों को राशन कार्ड बनाया गया है, उड़सुगी गोरा नाला पर टेंडर के माध्यम से पुल का निर्माण कराया गया है जबकि उड़सुगी की कुशमाहा टोला पर भी पुल का निर्माण कराया गया है।
उन्होंने बताया कि करीब 700 वृद्धा, विधवा, दिव्यांग का पेंशन की स्वीकृति उनके द्वारा कराया गया है जबकि अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने करीब 500 प्रधानमंत्री आवास के लाभुकों को इसका लाभ दिलवाए हैं और आवास प्लस में 1385 लाभुकों का नाम जोड़वाने का कार्य किये हैं और 29 सार्वजनिक जगह पर जल मीनार लगाया गया है जबकि 20 महत्वपूर्ण पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है और अभी चार मिट्टी मोरम का पथ का निर्माण हो रहा है।
इस पंचायत में 50% आदिवासी निवास करते हैं। यह पंचायत गढ़वा नगर परिषद से मात्र 2 किलोमीटर पर है, लेकिन इतने वर्षों के बाद भी विकास के मायने में पिछड़ा हुआ है। अब इसमें जिनका भी उदासीनता हो लेकिन आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में यहां के पंचायतवासी किसको मुखिया का ताज पहनाते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
क्योंकि यहां प्रमुख रूप से दो धुरंधर प्रत्याशी हैं, जिसमें पूर्व प्रत्याशी राजन उरांव हैं, जबकि वर्तमान मुखिया जो अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजन उरांव से 277 मत से चुनाव जीत कर मुखिया पद पर काबिज हुए थे।