गढ़वा : मनरेगा समेत विभिन्न सरकारी मदों में वेंडरों को जो भुगतान हो रहा है। उसमें उचित राजस्व की कटौती नहीं की जा रही है। खनिज रॉयल्टी कई वेंडर्स अपने पास ही रख ले रहे हैं। इससे सरकार को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसकी जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक महकमा रेस हो गया है। अब ऐसे वेंडर्स को चिह्नित कर इनसे रॉयल्टी की राशि वसूली को ले कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा इसकी शुरुआत गढ़वा प्रखंड से की गई है। इस पूरे प्रकरण में संबंधित वेंडर्स के साथ-साथ गढ़वा बीडीओ की भी मिलीभगत की बात कही जा रही है।
क्या है मामला :
उपायुक्त हर्ष मंगला द्वारा खनन टास्क फोर्स की बैठक 17 जून को की गई थी। इस दौरान पाया गया कि मनरेगा एवं अन्य मदों में जो भुगतान विभिन्न वेंडर्स को हो रहा है।
उसका उचित राजस्व की कटौतियां नहीं की जा रही है और खनिज रॉयल्टी कई वेंडर्स अपने पास ही रख ले रहे हैं। इस मामले का सामने आने के बाद उपायुक्त ने खुद ही जांच शुरू की। उन्होंने गढ़वा प्रखंड के संग्रहे खुर्द पंचायत के मनरेगा के 2 अभिलेखों की जांच की। अभिलेखों की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। इस दौरान पाया गया कि विभिन्न वेंडर्स को बहुत बड़ी राशि वर्ष 2019-20 में भुगतान हुई। जिसके विरुद्ध कटौती राशि जमा करने की सूचना नहीं है। इसके आधार पर उपायुक्त द्वारा गढ़वा प्रखंड में कुल कितने वेंडर्स को कितना भुगतान हुआ इसका चार्ट बनाया गया। साथ ही उपायुक्त ने जब गढ़वा के एक वेंडर को गुरुवार को बुलाकर उससे पूछताछ की तो उसने राशि जमा करने के लिए दो दिन का समय मांगा।
उसने उपायुक्त को बताया कि वर्ष 2018-19 के रॉयल्टी की राशि भी अब तक जमा नहीं हुई है। उपायुक्त के अनुसार इस पूरे प्रकरण में गढ़वा बीडीओ की लापरवाही एवं मिलीभगत से इन्कार नहीं किया जा सकता। उपायुक्त ने इस प्रकार का परीक्षण जिले के अन्य प्रखंडों का करने तथा संबंधित वेंडर्स को स्पष्टीकरण करने का निर्देश उप विकास आयुक्त नमन प्रियेश लकड़ा को दिया है।