केतार : गढ़वा जिले के केतार थाना 65 वर्षीय विचाराधीन कैदी रघुनी साह के सदर अस्पताल में मौत का मामला तूल पकड़ लिया है। क्योंकि इस मामले में परिजनों ने शव को घर पहुंचने के बाद एंबुलेंस से उतारने से इनकार कर दिया है। वही भाजपा ने भी इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन व जेल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है।

खबर है कि आज शाम 5:00 बजे एंबुलेंस से जैसे ही रघुनी का शव घर पहुंचा। गांव वालों ने एंबुलेंस को घेर कर हंगामा शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उपायुक्त घटनास्थल पर पहुंचकर जेल प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करेंगे तथा परिजनों को 20 लाख रु मुआवजा एवं सरकारी नौकरी एक सदस्य को नहीं देंगे, तबतक वे लोग एंबुलेंस से शव नहीं उठाएंगे घटनास्थल पर केतार के थाना प्रभारी राजबल्लभ कुमार मौजूद होकर ग्रामीणों को समझाने बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।
बावजूद ग्रामीण सुनने को तैयार नहीं हैं।
विदित हो कि रघुनी को केतार थाना की पुलिस ने अवैध शराब भट्टी चलाने के आरोप में पिछले करीब 2 माह पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल में ही रघुनी की तबियत खराब हो गई। इसके बाद 12 फरवरी को जेल प्रशासन के द्वारा रघुनी को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। फिर कल डॉक्टरों के सलाह पर रघुनी को स्वस्थ होने की बात कह के जेल भेज दिया गया था। जब वह जेल पहुँचा तो फिर उसे पेट में दर्द होने लगी। जेल प्रसासन ने फिर उसे करीब 4 बजे सदर अस्पताल इलाज के लिए भेजा, लेकिन शाम करीब 5:00 बजे इलाज के दौरान रघुनी साव की मौत हो गई।
यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है, क्योंकि रघुनी साव के पुत्र कुंडल कुमार साव ने जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मेरे पिता जी पहले ठीक थे।
हमारे पिताजी का तबीयत जेल में अचानक आने के बाद खराब कैसे हो गई, यह सोचनीय विषय है। उनका तबियत खराब है। इसकी जानकारी उनलोग को पहले जेल प्रशासन के द्वारा नहीं दी गई थी। लेकिन आज हम सभी को सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर जानकारी मिला की हमारे पिताजी का देहांत हो गया है। कुंडल कुमार साव ने रोते हुए कहा कि जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उनकी मौत हुई है। उसने बताया कि जब पुलिस के द्वारा उसके पिताजी को जेल भेजा गया था, उसके बाद कभी भी परिजन को उन से नहीं मिलने दिया गया। वे लोग प्रतिदिन जेल गेट के सामने आकर अपने पिताजी से मिलना चाह रहे थे, लेकिन उन लोग को नहीं मिलने दिया गया। उसने बताया की 12 फरवरी को उसके पिताजी को अगर लाया गया है तो, उससे पहले हम लोग को क्यों नहीं मिलने दिया गया।
उसने आशंका जताते हुए जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया है।
जबकि प्रभारी जेल अधीक्षक विजेंद्र कुमार ने बताया कि कैदी पिछले कई दिनों से बीमार से बीमार थे। उन्हें किडनी की समस्या थी, लेकिन जेल प्रशासन के द्वारा पूरी ईमानदारी के साथ उनका इलाज कराने का प्रयास किया गया है। जबकि सिविल सर्जन दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि कैदी मरीज को किडनी और लिवर प्रॉब्लम था। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों की एक विशेष टीम के द्वारा उनका इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ विभाग ने इलाज में कोई कोताही नहीं बरता है।
लेकिन अब यह मामला प्रकाश में आने के बाद आज गढ़वा जिला भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश केसरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सदर अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी जाननी चाही औऱ परिजनों से बात किया।
इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। जिसमें गढ़वा कारागार में बंद रघुनी साव का मौत संदेहास्पद स्थिती में हुआ है। रघुनी साव ताली गाँव के काफी गरीब किसान थे। उनकी मौत के लिए जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों समान रुप से दोषी हैं। मौत होने के 24 घंटे बाद भी मृतक के परिजन को खबर नहीं मिली है। यह मामला काफी गंभीर है। डाक्टर की लापरवाही भी स्पष्ट रुप से सामने आ रही है। साथ ही जेल नियम की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई गयी। मृतक के परिजन को किसी बात की जानकारी तक नहीं दी गयी है। जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी ने कहा कि झामुमो सरकार झारखंड में दोहरी नीति चला रही है। यह सरकार गरीब विरोधी है। झारखंड में रिम्स में इलाजरत राजद सुप्रीमो चारा घोटाले में सजा काट रहे लालु यादव के लिए हेमंत सरकार ने रिम्स निदेशक का बंगला खोल दिया।
वहीं दुसरी ओर गढ़वा में गरीब किसान की मौत इलाज के अभाव में हो गयी। झामुमो सरकार में अमीर के लिए अलग और गरीब के लिए अलग व्यवस्था है। झारखंड की जनता इनकी मानसिकता को समझ चुकी है। हेमंत सरकार में गरीबों की मौत खुलेआम हो रही है। भाजपा गढ़वा जिला इकाई जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से यह माँग करती है कि मृतक के परिजन को 20 लाख मुआवजा, आश्रित को नौकरी और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि गढ़वा उपायुक्त एवं हेमंत सरकार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। उन्होने कहा कि सदर अस्पताल में मरीजों का ठीक से ख्याल नहीं रखा जा रहा है। मरीज को स्ट्रेचर भी नहीं मिलता है। एम्बुलेंस व्यवस्था भी खराब हो चुका है। डाक्टर भी समय से नहीं बैठते हैं।
गढ़वा सिवील सर्जन भी गायब रह रहे हैं। ऐसे स्वास्थ्य विभाग का व्यवस्था है तो आम जनता का समस्या कौन सुनेगा? अगर दोषियों के ऊपर कड़ी कारवाई नहीं होती है और मामले की लीपा पोती की गयी तो भाजपा गढ़वा जिला के तमाम जनता के साथ चरणबद्ध आन्दोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी सारी जबावदेही जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की होगी।
इस मौके पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजीव रंजन तिवारी, जिला मिडीया प्रभारी विवेकानंद तिवारी, जिला कार्यसमिति सदस्य विजय केशरी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष रीतेश चौबे, गढ़वा नगर मंडल अध्यक्ष उमेश कश्यप, राजकुमार गुप्ता, रविन्द्र यादव, प्रभाजर चौबे सहित अन्य कई भाजपा कार्यकर्ता मौजुद थे।