गढ़वा : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट को जहां सत्ता पक्ष के लोगों ने सराहना की है, वहीं विपक्ष ने इस बजट को मिडिल क्लास तथा गरीबों का विरोधी बताया है।
व्यवसायी विनोद कमलापुरी ने बजट की सराहना करते हुए कहा है कि कोरोना काल से राहत देने के लिये आत्म निर्भर हेल्थ स्किम एवं शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा आवंटन तथा व्यवसाय में ऑडिट की सीमा एक करोड़ से बढ़ा कर पाँच करोड़ एवं पंचानबे प्रतिशत डिजिटल लेनदेन करने वाले व्यवसाय की ऑडिट सीमा पाँच करोड़ से बढ़ा कर दस करोड़ करना देश हित में क्रांतिकारी कदम साबित होगा।स्टार्टअप के लिये एक साल का टैक्स हॉलिडे बढाने से आत्म निर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा।
इधर झामुमो के वरिष्ठ नेता परेश तिवारी ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने एक तरफ महामारी की मार झेलने वाले आम आदमी को राहत देने की चुनौती थी, तो दूसरी ओर आर्थिक विकास और उद्योग जगत पर फोकस करनी थी।
पर हुआ बिल्कुल उलट सैलेरीड क्लास और आम आदमी को निल बटा सन्नाटा। आम आदमी और सैलरीड क्लास के उपयोग की चीजें और रोजमर्रा की वस्तुएँ महंगी हुई, जैसे मोबाइल फोन और मोबाइल फोन के पार्ट, चार्जर गाड़ियों के पार्ट्स इलेक्ट्रानिक उपकरण कपड़े सोलर इन्वर्टर, सोलर से उपकरण कॉटन। अमीरों के इस्तेमाल की चीजें सस्ती हुई स्टील से बने सामान, सोना, चांदी, तांबे का सामान, चमड़े से बने सामान आदि। और सबसे खास बात, रतन टाटा, आदि गोदरेज, राहुल बजाज, अजीम प्रेमजी जैसै 75 वर्ष से अधिक आयु के उद्योगपतियों की आय पर कोई टैक्स नहीं।
वहीं सत्ता पक्ष के गढ़वा जिला भाजयुमो के पूर्व जिला अध्यक्ष ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट आम जन मानस के राहत देने वाला, नया भारत कि परिकल्पना करने वाला, आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट है।
इस बजट में किसानों कि आय दुगनी करने वाला है। शिक्षा हो या स्वास्थ्य सभी छेत्र में आम जनता, गाँव, गरीब, किसान, युवाओं के लिए है यह बजट, नया भारत- नया सवेरा लेकर आयगा।
इधर झामुमो के जिला प्रवक्ता धीरज कुमार दुबे ने कहा है कि बजट में मिडिल क्लास खाली हाथ ही रहा। सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया, न ही कोई छूट दी। असम-बंगाल के चुनाव को देखते हुए बजट का भी राजनीतिकरण किया गया।