गढ़वा : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रतिनिधि संगठन "श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, निधि समर्पण अभियान" के प्रतिनिधियों का शहर के रेलवे स्टेशन रोड में रामलला मंदिर के प्रांगण में स्थित संघ कार्यालय में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया।
पत्रकारों से बात करते हुए बात करते हुए"श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण अभियान" समिति के जिला संयोजक राजेश प्रताप देव ने कहा कि श्री राम धर्म के मूर्तिमंत स्वरूप हैं। श्रीराम भारत की आत्मा हैं। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण भारतीय मन की शाश्वत प्रेरणा है। इसके लिए श्री राम भक्तों ने 492 वर्षों तक अनवरत संघर्ष किया है। अतीत के 76 संघर्षों में चार लाख से अधिक राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया।
लगभग 36 वर्षों के सुसूत्र श्रृंखलाबद्ध अभियानों के फलस्वरूप संपूर्ण समाज ने लिंग, जाति, वर्ग, भाषा, संप्रदाय, क्षेत्र आदि भेदों से ऊपर उठकर एकात्मभाव से श्रीराम मंदिर के लिए अप्रतिम त्याग और बलिदान किया है। परिणाम स्वरूप 9 नवंबर 1989 को श्रीराम जन्मभूमि पर शिलान्यास पूजन पूज्य संतों की उपस्थिति में अनुसूचित समाज कामेश्वर चौपाल ने किया। श्रीराम जी के जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो इस निमित दिनाँक पंद्रह जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक पूरे 45 दिनों की विशेष सम्पर्क अभियान चलाकर निधि संग्रह करने का निर्णय लिया गया है।
पूरे गढ़वा जिले के 20 खंड, पंचायत, और ग्राम स्तर पर समिति गठन कर दिया गया है और पूरे जिले से निधि संग्रह किया जायगा।
विशेष संपर्क अभियान चलाकर श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज एवं समस्त भारतवंशियों से निधि संग्रह करने का निर्णय लिया गया है।
जबकि पत्रकारों से बात करते हुए अभियान के जिला सह संयोजक आशीष कुमार वैद्य ने कहा कि राम मंदिर भूमि पूजन के पावन अनुष्ठान में झारखंड के भी रामरेखा धाम, अंजन धाम, टांगीनाथ धाम, बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ धाम, भद्रकाली मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, छिन्नमस्तिका मंदिर, गढदेवी मंदिर, बंशीधर मंदिर, केतार चतुर्भुजी मंदिर के साथ साथ सैकड़ों गांवों के मंदिरों तथा ग्यारह सौ से ज्यादा स्थान एवं सरना स्थलों, गुरुद्वारों, बौद्ध मंदिरों, जैन तीर्थ सम्मेद शिखर जी पार्श्वनाथ, भगवान बिरसा मुंडा जन्म स्थली उलिहातू सहित 21 स्थानों की पूजित पवित्र मिट्टी तथा मां गंगा, सोन, कोयल, दामोदर सहित 53 नदियों, झरनों एवं कूपों के पूजित-पवित्र जल संग्रह कर भेजे गए, जो अनुष्ठान के साक्षी बने।
पूज्य संतों ने आवाहन किया कि श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर बनने के साथ-साथ जन-जन के हृदय मंदिर में श्रीराम एवं उनके जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा हो। श्रीराम 14 वर्षों तक नंगे पैर वन-वन को घूमे, समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, उन्होंने वंचित, उपेक्षित समझे जाने वाले लोगों को आत्मीयता के साथ गले लगाया, अपनत्व की अनुभूति कराई, सभी से मित्रता की। जटायु को भी पिता सा सम्मान दिया, नारी की उच्च गरिमा को पुनर्स्थापित किया। असुरों का विनाश कर आतंकवाद एवँ भय का समूल नाश किया। राम राज्य में परस्पर प्रेम, सद्भाव मैत्री, करुणा, दया, ममता-समता, बंधुत्व, आरोग्य, त्रिविधताप, सर्वसमृद्धि पूर्ण जीवन सर्वत्र व्याप्त था। हम सब को पुनः अपने दृढ़ संकल्प एवं सामूहिक पुरुषार्थ से ऐसे ही भारत बनाना है।
पत्रकार बंधुओं से बात करते हुए अभियान के जिला हिसाब-किताब प्रमुख श्री कृष्ण मुरारी पांडे ने कहा कि दान भारतीय सनातन समाज की पुरातन विदेश विशेषता रही है। विद्यार्थी, वानप्रस्थी, सन्यासी, भिक्षु आदि को जीवन यापन हेतु संसाधन उपलब्ध कराना, मंदिर एवं तीर्थों में धर्मशाला तथा अन्य समाजोपयोगी स्थानों का निर्माण कराना, सहयोग करना-कराना, समाज के श्रीमंतों का शाश्वत स्वभाव रहा है, यह सामाजिक कर्तव्य भी माना गया है। सभी जनमानस को इस पुनीत कार्य मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए।