गढ़वा : तीन दिनों से लापता शहर के पाठक मोहल्ला निवासी धनंजय कुमार पाठक के पुत्र रितेश कुमार पाठक का शव शनिवार सुबह सोनपुरवा स्थित एक कुएं से संदेहास्पद स्थिति में बरामद किया जाने कि घटना के बाद परिजनों तथा आम लोगों में गढ़वा पुलिस की कार्रवाई के प्रति तीखा रोष व्याप्त है। परिजनों का मानना है कि पुलिस यदि गुमशुदगी की सूचना देने के बाद तत्पर रहती तो रितेश का जान बच सकता था क्योंकि पुलिस को युवक के लापता की सूचना 31 दिसंबर की ही रात्रि दे दी गई थी।
विदित हो कि 30 दिसंबर के रात्रि 7:00 बजे से ही घर से रितेश गायब हुआ था। रात्रि 10:00 बजे तक जब वह घर नहीं लौटा तो रात भर उसकी खोजबीन परिजनों के द्वारा की गई और सुबह पुलिस को उसके गायब होने की सूचना दी गई थी।
बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरकर बैठी रही नतीजा रहा रितेश की हत्या कर शव को कुएं में डाल दिया, जहां से आज शव बरामद किया गया है।
घटना की सूचना मिलने पर आस-पास के इलाके में सनसनी फैल गई। बड़े तादात में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पहुंची और शव को कुएं से निकालने का प्रयास किया। पर आक्रोशित परिजनों ने जिले के वरीय पुलिस पदाधिकारियों को घटनास्थल पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। कुछ देर तक वरीय पदाधिकारियों के आने से इंतजार के बाद आक्रोशित परिजनों ने एनएच 75 को जाम कर दिया। उससे रेहला रोड़ और शहर की ओर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। आक्रोशित परिजन भी जिला पुलिस प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाला।
आक्रोशित परिजनों ने कहा कि जिला मुख्यालय में एक युवक की हत्या कर शव को कुएं में डाल दिया जाता है। उसके बाद भी पुलिस मौन रहती है। घटना की सूचना अधिकारियों को दिया जाता है, उसके बाद भी घटनास्थल नहीं पहुंचते है। परिजनों ने कहा कि 31 दिसंबर को ही रितेश के लापता होने की सूचना पुलिस को दी गई थी। परिवार के सदस्य लगातार थाना में एसआई से सम्पर्क कर घटना में कुछ जानकारी मांग रहे थे, पर पुलिस जांच कर रही है, कि बात कह टालमटौल करती थी। आखिर अपराधियों ने रितेश का हत्या कर शव को कुएं में डाल दिया। परिजनों ने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया।
हालांकि जाम के डेढ़ घंटे बाद थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह घटनास्थल पर पहुंचकर परिजनों को समझाते हुए और जल्द ही मामले की उद्भेदन करने की आश्वासन पर जाम हटवाया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।
उसके बाद यातायात शुरू हुई।