भवनाथपुर (गढ़वा) : प्रखंड के अंतर्गत रा. म. वि. चपरि के आठवी कक्षा के चार दर्जन छात्र छात्रा व अभिभावक मंगलवार को बीआरसी कार्यलय पहुंच कर बीईओ राकेश कुमार को आवेदन देकर वर्ष 20 में आठवीं बोर्ड की परीक्षा से वंचित होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। जिस पर बीईओ ने छात्रों के आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि यह गलती विद्यालय प्रबंधन व विभाग का न होकर रांची जैक के द्वारा हुई है जिसका मुख्य वजह कोरोना महामारी है। इसमें जिला से सैकड़ों बच्चे प्रभावित हुए हैं।
क्या है मामला
बताते चलें कि वर्ष 20 में आठवीं बोर्ड की परीक्षा में रा. मध्य विद्यालय चपरि से कुल 114 छात्र छात्राओं ने आठवीं बोर्ड का ऑन लाइन फर्म भरा था। जिसमें कुल 51 बच्चों का ही एडमिट कार्ड मिला।
बाकी बचे बच्चे को दुबारा फार्म भरने का निर्देश प्राप्त हुआ था। परन्तु विभाग के द्वारा तय समय में हुई परीक्षा में बाकी बचे छात्र का दुबारा फार्म भरने के बावजूद अनुपस्थित हो गए। जिस पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेद कुमार के द्वारा सभी बचे लोगों को दुबारा परीक्षा में शामिल होने का आश्वासन मिला था। परन्तु परीक्षा में सम्मिलित सभी बच्चे आठवीं पास कर, नवीं कक्षा में चले गए और बाकी बचे लोगों को अब आठवीं में ही दुबारा पढ़ने को बोला गया। जिससे छात्र व अभिभावकों में काफी रोष हो गया।
क्या कहना है बच्चों एवं अभिभावकों का
मंगलवार को छात्र अपने अभिभावकों के साथ नासिर अंसारी, मोहमद अंसारी, आशीष कुमार, नीतीश कुमार, कृष्णा कुमार, अर्चना कुमारी, ज्योति कुमारी, तारा, श्वेता, चंदा, सरला खातून, मैजून खातून, सीवी कुमारी सहित लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि गलती किसी और कि और एक वर्ष की सजा हमलोग क्यों भुगते।
हमारे अभिभावक मेहनत मजदूरी करते हुए हमें पढ़ाया लिखाया, परन्तु जिसकी भी गलती है, उसका सजा हमलोग नही भुगतेंगे। इसके लिए हम सभी लोगों को जो भी लड़ाई लड़ना पड़े लड़ेंगे। छात्रों ने इसके मुख्य जिम्मेवार विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार के उपर लगाया है कि बार-बार पुछे जाने पर उनके द्वारा बताया गया था कि आप बचे हुए लोगों का भी परीक्षा लिया जाएगा, जिसके कारण हम सबों के साथ यह धोखा किया गया। छात्रों ने इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों व सरकार से पत्र भेज कर अपने एक वर्ष की वंचित पढ़ाई के लिए गुहार लगाने की बात कही है।
क्या कहना है प्राचार्य का
वहीं इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश कुमार से पूछे जाने पर बताया की इस मे मेरी कोई गलती नहीं बल्कि जैक के आदेश के अनुसार ही बच्चों को आश्वासन दिया गया था। एक वर्ष पढ़ाई वंचित होने से हमें भी दुख है।