बंशीधर नगर : कृत्रिम गर्भाधान से पशुओं की नस्ल सुधार की कवायद चल रही है। हालांकि पशु पालकों में जागरूकता की कमी कहे है या फिर प्रचार-प्रसार में कमी योजना पूरी तरह से सार्थक साबित नहीं हो पा रही है। हालांकि अब ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम चलाए जाने की वजह से पहले की तुलना में नस्ल सुधार के लिए पशु पालकों द्वारा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराने का रुझान बढ़ा है। भारत सरकार द्वारा संचालित इनफॉरमेशन नेटवर्क ऑफ हेल्थ एंड प्रोडक्टिविटी के अंतर्गत नस्ल सुधार हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम बंशीधर नगर प्रखंड के 36 गांव में फेज दो, 1 अक्टूबर से चल रही है।
जिसके तहत बिलासपुर हलिवंता कला और खुर्द, जोर्मा, सुलसुलीया, कोरेया,जमुआ, जमुई, कुंबा, पतरिहा कला और खुर्द, हल्हुलाखुर्द और कला, नरखोरिया, पुरैनी, मंगरदह, बारीडीह, महदेहिया, बंशीधर नगर, पूर्णानगर, भोजपुर, कधवन कॉइंदी, कुशदंड, अधौरा, पालहें, जतपुरा, सलसलादी, मर्च्वार, चित्विश्राम, कोल्हुआ, बभनी, सोनवर्षा, झरिया, पिपरडीह में चल रही है।
प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ रामा शंकर प्रसाद द्वारा बताया गया कि कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार होगा। जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि भैंस या गाय शरीर में तगड़ी हो तभी दूध भी ज्यादा देगी, दूध उसकी नस्ल पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि अब तक सेंटर पर प्रजनन के लिए अच्छी नस्ल के सांड या भैंस उपलब्ध कराने के बजाय कृत्रिम विधि से नस्ल सुधार का प्रयोग किया गया और वह सफल भी साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया के प्रति पशुपालकों का रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने सभी संबंधित पशुपालकों से अनुरोध किया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना का लाभ उठाएं जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा एवं आय में बढ़ोतरी होगी।