गढ़वा : जिले से चयनित एकमात्र गांव मेढ़ना खुर्द में इस योजना के तहत संचालित विकास कार्यों में भारी गड़बड़ी, सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों में वर्णित कार्यों एवं भुगतान की गई राशि की तुलना में धरातल पर कार्य करने में भारी गड़बड़ी एवं असमानताएं हैं,
गढ़वा जिले से अनुसूचित जाति ग्राम योजना के तहत चयनित एकमात्र गांव मेढ़ना खुर्द में इस योजना के तहत संचालित विकास कार्यों में भारी गड़बड़ी की गई है। इस योजना के तहत योजना कार्यान्वयन समिति की गठन से लेकर योजनाओं के चयन और इसके क्रियान्वयन में भारी अनियमितता बरती गई है। इसका खुलासा तब हुआ जब वहां के ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार के तहत इस योजना के संबंध में संबंधित विभाग से जानकारी मांगी।
सूचना के अधिकार के तहत संबंधित विभाग द्वारा प्राप्त दस्तावेजों में वर्णित कार्यों एवं भुगतान की गई राशि के सापेक्ष धरातल पर कार्य करने में भारी गड़बड़ी एवं असमानताएं है। ग्रामीणों के अनुसार इस योजना के लिए अधिकृत कार्यकारी एजेंसी(एनजीओ) और गांव में इस योजना के तहत फर्जी तरीके से गठित योजना कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष की मिलीभगत से योजनाओं में व्यापक धांधली हुई है और निर्गत राशि का बंदरबांट किया गया है।
इस संबंध में गांव के वयोवृद्ध नागरिक सह सेवानिवृत शिक्षक नारद मुनि माझी ने कहा कि बिना आम सभा एवं ग्रामीणों के सूचना के गुप्त तरीके से योजना कार्यान्वयन समिति का गठन कर लिया गया। इसमें पूर्व/तात्कालिक मुखिया के पुत्र सोशल पासवान को अध्यक्ष, पूर्व/तात्कालिक पंचायत समिति सदस्य की पत्नी सुमन देवी को सचिव और पूर्व/तात्कालिक वार्ड सदस्य विनोद कुमार राम को कोषाध्यक्ष और अन्य आठ महिला-पुरुषों को सदस्य बनाकर 11 सदस्य समिति का फर्जी तरीके से गठन कर दिया गया।
यहां तक की इतने बर्ष बीतने के बाद भी इसमें सदस्य के रूप में मनमाने तरीके से चयनित महिला-पुरुषों तक को यह पता नहीं है कि वह इस योजना कार्यान्वयन समिति के सदस्य बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आज तक योजना के विषय में आम नागरिकों से कोई राय नहीं ली गई है। योजना एवं उसका स्थान चयन में भारी अनियमितता बरती गई है। जबकि नियमानुसार योजनाओं का चयन व योजना स्थल का चयन योजना कार्यान्वयन समिति की अगुवाई में ग्रामीणों के साथ आम बैठक के जरिए होना चाहिए।
अधूरा सामुदायिक भवन
ग्रामीणों ने कुछ योजनाओं में हुई धांधली की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा प्राप्त सूचना के तहत 160000 की लागत से पावर ट्रेलर खरीद के लिए कार्यकारी एजेंसी को शत प्रतिशत राशि भुगतान कर दी गई है।
लेकिन कार्यकारी एजेंसी और कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के मिलीभगत से राशि तो निकाल ली गई। लेकिन पावर ट्रेलर गांव नहीं आया। गांव में साइन बोर्ड स्थापित करने के निमित्त विभाग द्वारा स्वीकृत राशि 26500 में शत प्रतिशत निकासी कर ली गई। लेकिन सभी साइन बोर्ड का कार्य अभी भी अधूरा है।
इसी प्रकार डीप बोरिंग में भी काफी अनियमितता हुई। बोरिंग कर के उसमें मशीन आजतक नहीं लगाई गई। जबकि कार्य के सापेक्ष अधिक की राशि की निकासी कर ली गई। इसी प्रकार सोलर पावर ड्रिंकिंग वाटर सिस्टम में भी कार्य के सापेक्ष अधिक राशि निकाल लेने की अनियमितता हुई।
अधूरा सिंचाई सिस्टम
निजी स्वार्थ में सामुदायिक भवन जो अधूरा है का निर्माण अनुपयुक्त जगह पर कर दिया गया।
महिंद्रा ट्रैक्टर 35 एचपी की खरीद के लिए प्राप्त राशि से ट्रैक्टर तो खरीद ली गई। लेकिन इसका निजी इस्तेमाल हो रहा है। उससे सार्वजनिक काम नहीं हो रहा है। अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष इसे निजी संपति बताते हैं। कुल मिलाकर सारी योजनाओं को उपयुक्त स्थान के बदले निजी स्वार्थ में अपने जमीन में किया गया है। इसमें आम जनता की कोई सहमति नहीं ली गई है।
क्या है उन्नत ग्राम योजना :
उन्नत ग्राम योजना के तहत पूरे राज्य में अनुसूचित जाति बहुल 27 गांव का चयन कुछ बर्ष पूर्व किया गया था। यह योजना उन गांव में चल रही है जहां अनुसूचित जाति की आबादी 90 से 100 प्रतिशत तक है। जिसमें गढ़वा जिले से मेढ़ना खुर्द गांव का इस योजना के लिए चयन किया गया है।
इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में साइन बोर्ड, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर ड्रिंलकिंग वाटर सप्लाई, पावर ट्रीलर, कृषि कार्य में सिंचाई के लिए आठ ईंच का डीप बोर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ, सामुदायिक भवन आदि के अलावे हर वैसा बुनियादी कार्य किया जा रहा है जो एक आधुनिक एवं उन्नत गांव के लिए आवश्यक हो।
जांच में कई अन्य अनियमितताओं का हो सकता खुलासा :
मामले संबंध में ग्रामीणों ने कहा है कि यदि इन योजनाओं की सही तरीके से जांच की जाती है तो शिकायत पत्र में वर्णित तथ्यों के अलावे भी कई अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। क्योंकि उक्त लोगों ने जो जानकारी सूचना अधिकार के तहत संबंधित विभाग से मांगी थी उसी के संदर्भ में जानकारी उपलब्ध हुई है।
इसके अलावे भी कई योजनाएं हैं जिनमें अनियमितताएं बरती गई हैं। लेकिन ग्रामीणों को इस संबंध में साक्ष्य के तौर पर फिलहाल सूचना अधिकार से दस्तावेज प्रात नहीं है। ग्रामीण ललन पासवान ने बताया कि यदि सही तरीके से योजनाओं को धरातल पर उतारा जाता तो गांव का कलेवर चेंज हो जाता। उन्होंने बताया कि इस योजना के करीब 36 करोड़ की राशि से गांव का समग्र विकास करना था। ऐसे में जाहीर है कि कई ऐसी योजनाएं में भी अनियमितताएं होंगी। जिसकी ग्रामीणों को जानकारी नहीं है।
उपायुक्त से कार्रवाई की मांग :
ग्रामीणों ने इस संबंध में उपायुक्त गढ़वा, प्रधानमंत्री कार्यालय व मुख्यमंत्री के नाम आवेदन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि इस संदर्भ में एक माह पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री और उपायुक्त को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की।
लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे सभी ग्रामीण दुःखी हैं।
मांग करने वाले ग्रामीणों में ललन कुमार पासवान, शिवलाल पासवान, नंदलाल पासवान, अक्षय कुमार पासवान, देवेंद्र पासवान, संगीता देवी, सतीश पासवान, शैलेश कुमार पासवान, रामगनी राम, जय शंकर पासवान, मुखलाल राम सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल है।