बिशुनपुरा : सरकार गरीब व विधवा, असहाय महिलाओ को पेंशन, राशन, पक्का मकान का लाभ देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और भूख से मौत को रोकने का लाख दावा करे, लेकिन धरातल पर जो तस्वीर है, वह सरकारी दावे की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। आजादी के 73 वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों को भर पेट भोजन, रहने का छत नसीब नहीं हो पा रहा है। निष्ठुर लोकत्रत और लापरवाह प्रतिनिधि होने का खामियाजा विधवा महिलाएं आज भी भुगत रही हैं। उनकी जिंदगी फटेहाली के साथ भीख के सहारे कट रही है।
ऐसा ही मामला बिशुनपुरा प्रखंड अंतर्गत अमहर खास पंचायत के वार्ड नम्बर 10 की निवासी दुलारी कुंवर (उम्र 52 वर्ष) पति स्वर्गीय बैजनाथ राम एवं एक पुत्र गौतम कुमार उम्र 5 वर्ष इन दोनों की जिंदगी आज भी पड़ोसी के सहयोग से और भीख मांग कर कट रही है।
इस विधवा महिला को आवास की बात तो दूर विधवा पेंशन, पारिवारिक लाभ एवं अन्य बुनियादी सुविधा नहीं मिला है। विधवा महिला अपने पति के गुजर जाने के बाद किसी तरह एक छप्पर के नीचे दिन काट रही है।
विधवा महिला दुलारी कुँवर ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि मेरे पति राजस्थान में प्लांट में काम करते थे, काम करते करते उनकी तबियत अचानक खराब होने के बाद घर आने के क्रम में ही मौत हो गई थी। मेरे पति के गुजरने के एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी भी कोई सुध तक लेने नहीं आये। जिसके बाद अपनी फरियाद लेकर पंचायत सचिवालय, प्रखंड कार्यालय एवं जिला स्तरीय जनता दरबार में आवेदन दिए थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर पिछले एक वर्षो से दर दर की ठोकरे खा रही हूँ।
उन्होंने बताया कि मैं एक अनुसूचित जाति की हूं।
वहीं विधवा महिला दुलारी कुँवर ने प्रखंड पदाधिकारियों से थक हार कर जिला के बाल कल्याण समिति सीडब्लूसी गढ़वा में आवेदन देकर अपनी सारी दुखड़ा सुनाई। जिसके बाद बाल कल्याण समिति सीडब्लूसी गढ़वा द्वारा बिशुनपुरा बीडीओ को पत्र के माध्यम से विधवा महिला को आवास, पेंशन, परिवारिक लाभ, उचित राशन सहित अन्य सरकारी लाभ देने का निर्देशित किया गया है।