भंडरिया : भंडरिया थाना क्षेत्र के जमौति गांव निवासी केश्वर टोप्पो के 40 वर्षीय पत्नी सुबेद टोप्पो की शरीर में अब सिर्फ कंकाल बच गई है। समुचित इलाज के अभाव में सुबेद टोप्पो जीवन और मौत के बीच जुझ रही है।सरकार की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत इन लोगों के लिए दिखावा बनकर रह गया है। गरीबी और आर्थिक तंगहाली की आलम में जीवन बसर कर रहे केश्वर टोप्पो ने कहा कि उनकी पत्नी पिछले 2 वर्ष से बीमार है। गरीबी लाचारी के कारण वे पत्नी का समुचित इलाज नहीं करा पा रहे हैं। नतीजतन अब उनकी पत्नी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं। और कुछ दिन के ही मेहमान बची है। उसके शरीर में अब सिर्फ कंकाल बचा है।
उन्होंने बताया कि पत्नी सुबेद टोप्पो को साइकिल में बैठाकर सरकारी अस्पताल में कई बार ले गया।
तुरंत वहां डॉक्टरों ने दवा देने की बजाए सिर्फ कागज का पुर्जा थमा देते हैं। पैसे के अभाव में दवा नहीं ले पाते नतीजतन उनकी पत्नी की बीमारी और बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि कोई जनप्रतिनिधि या सरकार के कोई मुलाजिम अभी तक उनकी सुधि लेने नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि समुचित इलाज होता तो उनकी पत्नी ठीक हो जाती। उन्होंने कहा कि पत्नी कि कौन सी बीमारी है अब तक पता नहीं चल सका है। सुबेद की पूरे शरीर में जलन रहता है और दिन भर बेचैन रहती है। उन्होंने कहा कि सुबेद को झाड़ू फुंक भी कराया परन्तु कोई असर नहीं हुआ।
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण कहीं बाहर मजदूरी करने नहीं जा पा रहे हैं। गांव में रोजगार भी नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण घर में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
जब घर में खाने को ही कुछ नहीं ऐसे में पत्नी का इलाज करा पाना और भी मुश्किल काम हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा गरीबों के इलाज के लिए बड़े-बड़े योजना चलाए जा रहे हैं परंतु उसका भी लाभ इन गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि समुचित इलाज किया जाएगा तो अभी भी उनकी पत्नी ठीक हो जाएगी परंतु पैसे के अभाव में जीवन और मृत्यु के बीच जुझता देखने के अलावा और कुछ भी नहीं कर सकते।