गढ़वा :
प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर बलिदानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि

प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर बलिदानियों को सादर समर्पित वार्षिक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रभक्ति कार्यक्रम “तिलक करो इस मिट्टी से...” का आयोजन प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच, नवादा, गढ़वा (झारखण्ड) के द्वारा बंधन मैरिज हॉल, नवादा मोड़, गढ़वा में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, कलाकारों, समाजसेवियों एवं युवाओं ने भाग लेकर देश के अमर हुतात्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अतुल्य योगदान देने वाले गढ़वा जिले के अमर बलिदानियों चेमो-सनेया के नीलांबर-पीतांबर, रमकंडा के नारायण साव तथा बड़गड़ के भूखा साव हलवाई की जन्मस्थली से संग्रहित पवित्र मिट्टी के कलश पूजन के साथ हुआ। इसके उपरांत उपस्थित सभी लोगों को उसी पवित्र मिट्टी से तिलक लगाया गया। तत्पश्चात अखंड भारत के मानचित्र पर प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम की 169वीं वर्षगाँठ के सुअवसर पर 169 दीप सभी लोगों ने 18 बजकर 57 मिनट पर एक साथ प्रज्वलित किए। इस भावनात्मक क्षण ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत कर दिया।

प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम की 169वीं वर्षगांठ के अवसर पर अखंड भारत के मानचित्र पर 169 दीप प्रज्वलित कर समस्त अमर हुतात्माओं को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। दीपों की उजास और “भारत माता की जय”"वन्दे मातरम्" के उद्घोष से पूरा सभागार गूंज उठा।
कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जास्मीन खान ने प्रसिद्ध देशभक्ति गीत “ए मेरे वतन के लोगों...” की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं।
कवि श्रवण शुक्ल ने अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए सभी को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
विषय प्रवेश कराते हुए मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने कहा कि प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में बसने वाला अमर संघर्ष है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदानियों के गौरवशाली योगदान से परिचित कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध की भावना को जागृत करते हैं।
जगतारण तिवारी ने कहा कि अमर हुतात्माओं की कृत्यों से जन-जन को परिचय कराने का यह सशक्त और अनुकरणीय आयोजन है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक योगेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता लाखों बलिदानों का परिणाम है और हमें अपने अमर सेनानियों के संघर्ष को सदैव स्मरण रखना चाहिए।
समाजसेवी डॉ. पातंजलि कुमार केशरी ने कहा कि देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण में दिखाई देती है।
विश्व हिंदू परिषद गढ़वा जिला के महामंत्री सोनू सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और युवाओं को देश की एकता एवं अखंडता के लिए सदैव सजग रहना चाहिए।
योग गुरु अरुण मिश्र (फलाहारी बाबा) ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
शिक्षक अरुण कुमार दुबे ने कहा कि इतिहास के महान बलिदानियों की गाथा को जन-जन तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
समाजसेवी उमाकांत पांडेय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करते हैं।
अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
कला साधिका सरिता तिवारी ने कहा कि कला और संस्कृति राष्ट्र चेतना को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
डॉ. अरूणिमा ने महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक बताया।
वार्ड सदस्या गजाला सिद्दीकी ने कहा कि देशभक्ति किसी धर्म या समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की भावना है।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल प्राप्त कराटे गुरु मनोज संसाई एवं उनके शिष्यों द्वारा प्रस्तुत कराटे और तलवारबाजी का रोमांचक प्रदर्शन रहा। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को रोमांचित कर दिया और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
कराटे और तलवारबाजी के प्रदर्शन करने वाले सभी लोगों को प्रशस्ति-पत्र देकर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
धन्यवाद ज्ञापित किया संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के संरक्षक विजय सोनी (ललन सोनी) ने।
आयोजन को सफल बनाने में बंधन मैरिज हॉल के प्रोपराइटर ललन सोनी, गीतांश फिल्म्स एंड टीवी के निदेशक प्रदीप कुमार, कवि नीरज मल्लिक, रंगकर्मी कौस्तुभ, समाजसेवी सोनू सिंह, डॉ. अरूणिमा, कला साधिका सरिता तिवारी तथा अरविंद तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर डॉ. रमेश प्रसाद गुप्त, दया शंकर गुप्त, नीरज कुमार, अमोद कुमार सिन्हा, सोमनाथ सोनी, झूलन कुमारी, कृष्ण आनंद देव, ओम आनंद देव, समीर चौबे, वान्या सिद्दीकी, डॉली कुमारी, आरुषि कुमारी, श्रुति कुमारी, प्रकृति आनंद देव, अभिप्रिया कुमारी, आयुष कश्यप, खुशी कुमारी, स्वाति कुमारी, स्वास्तिक सोनी, पार्वती सिंह, समीर खान, सुनीला केशरी, राधा केशरी, विनय कुमार, संतोष अग्रवाल, अमृत कश्यप, दिलीप कुमार, पिंकी कुमारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन “वन्दे मातरम्...” के सामूहिक गान के साथ हुआ। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और बलिदानियों के प्रति सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।