बड़गड़(गढ़वा): प्रखंड क्षेत्र के अति सुदूरवर्ती और झारखंड की दूसरी सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी पर स्थित सरुअत गांव में दो वर्षों बाद बिजली की रोशनी लौट आई है। बीते एक सप्ताह से गांव में बल्ब जलने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांव में त्योहार जैसा माहौल है, और लोग इसे एक लंबे समय से अधूरे ख्वाब के पूरा होने जैसा मान रहे हैं।
ग्रामीणों ने जताई खुशी, सरकार को कहा धन्यवाद
ग्रामीण पोकली देवी, सिकंदर कोरवा, रामसुंदर कोरवा, विदेशी देवी, कुंती देवी, इकबाल यादव, भजनलाल यादव, लालमुनी यादव, छोटेलाल यादव, सज्जन यादव समेत अन्य ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बिजली का पहुंचना उनकी पीढ़ियों का सपना था।
ग्रामीणों ने बताया कि 2019 में बिजली गांव तक पहुंच गई थी, लेकिन घने जंगल और ऊंची पहाड़ी के कारण तार और पोल टूटने से आपूर्ति बाधित हो गई थी। अब, बिजली पहुंचने से बच्चे बल्ब की रोशनी में पढ़ाई कर सकेंगे और सिंचाई के कार्यों में भी मदद मिलेगी।
चुनौतियों के बावजूद मुमकिन हुआ बिजली का सपना
सरुअत गांव तक बिजली पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। पहाड़ी की चोटी तक बिजली के खंभे और तार पहुंचाना लगभग असंभव माना जा रहा था। लेकिन ग्रामीणों के सहयोग और संवेदक मुरलीधर पांडेय की इच्छाशक्ति ने इसे मुमकिन कर दिखाया।
विभागीय पदाधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
सरुअत गांव तक बिजली पहुंचाने में बिजली विभाग के पदाधिकारियों की भी अहम भूमिका रही। एससी असगर अली, ईई महेश्वर कुमार, एसडीओ पप्पू कुमार, जेई दीपक कुमार और संवेदक मुरलीधर पांडेय के प्रयासों से ही यह संभव हो पाया।
सरुअत गांव में बिजली आने के बाद वहां के निवासियों में नया जोश और उमंग देखा जा रहा है। ग्रामीण इसे एक नई शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद मान रहे हैं।