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लकड़ी व कोयले से जमीन व दीवारों पर चित्र उकेरती अंजलि बनी चित्रकार

location_on गढ़वा access_time 04-Feb-25, 09:54 AM visibility 714
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लकड़ी व कोयले से जमीन व दीवारों पर चित्र उकेरती अंजलि बनी चित्रकार
प्रथम पुरस्कार के साथ अंजली


अक्षय आलोक check_circle
संवाददाता



गढ़वा : जिला से लेकर राज्यस्तरीय सरकारी प्रतियोगिताओं में जीता क्रमश: फर्स्ट व थर्ड प्राइज

उसकी कला को सही मुकाम देने के लिए किसी व्यक्ति या संस्था से सहयोग की जरूरत

बेहद गरीब व बीमार माता पिता की बिटिया अंजलि को भगवान ने जन्म के समय ही अंजलि भरकर उसे कला उपहार में भेंट किया है। इसी कारण अपनी नैसर्गिक प्रतिभा को बचपन से ही जमीन से लेकर दीवारों एवं कागजों पर आकार देने में यह बेटी जुटी हुई है।

अंजलि द्वारा बनाई गई सावित्री बाई फुले की तस्वीर

इसकी यह जन्मजात प्रतिभा अब गांव एवं उसके स्कूल से बाहर निकल कर जिला एवं राज्य स्तर तक पहुंच चुकी है।

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अंजली द्वारा बनाए गए अन्य चित्र

प्रखंड मुख्यालय कांडी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में 11वीं की छात्रा अंजली कुमारी ने चित्रकारी में झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के द्वारा 30. 10. 24 को आयोजित जिला स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता में चित्रकारी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। जबकि इसी परिषद के प्रदेश स्तरीय कला उत्सव प्रतियोगिता रांची में 3 व 4 दिसंबर 2024 को उसने चित्रकारी का तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया है।

आज भी अंजलि संसाधनहीन स्थिति में अपनी कला को निखार देने की साधना में अनवरत जुटी है।

विद्यालय की वार्डन आर उषा ने बताया कि इस बालिका को मोबाइल या अन्य फोटो दिखाने पर उसे हू-ब-हू कागज पर उतार देती है।

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इसे यह जन्मजात प्रतिभा प्राप्त है। इस विद्यालय में वोकेशनल विषय तो है। लेकिन प्रारंभ से ही इस विषय के कोई शिक्षक शिक्षिका पद स्थापित नहीं हैं। इस के लिए निधि प्रदान की जाती है। लेकिन इस विषय की ट्रेनिंग देने वाली कोई शिक्षिका यहां या कहीं भी पदस्थापित नहीं हैं।

अंजलि बचपन में ही जमीन, स्लेट व दीवारों पर लकड़ी के टुकड़े, कोयला, खल्ली आदि से चित्र बनाया करती थी। इसके बाद कॉपी पर चित्र बनाना शुरू किया। जिसके लिए उसे डांट भी खानी पड़ती थी। क्योंकि गरीब अभिभावक किसी प्रकार पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था कर पाते हैं। कॉपी पर लगातार चित्र बनाकर उसे खत्म कर दिया जाए तो फिर बार-बार कॉपी खरीदनी पड़ेगी। वह तो चित्रकारी के साथ-साथ पढ़ने में भी अंजलि एक मेधावी छात्रा है।

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जिसने गांव के विद्यालय से पांचवी कक्षा पास करके कस्तूरबा विद्यालय की नामांकन परीक्षा में सफलता प्राप्त करके वहां नाम लिखाने में सफल रही। जहां उसकी कला को निखार देने के लिए अल्प मात्रा में ही सही लेकिन संसाधन उपलब्ध होने लगा। वोकेशनल विषय के फंड से उसकी कला को देखते हुए पेंट ब्रश आदि उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन अंजलि को अब कैनवास (चित्रकारी का बोर्ड) एवं पेंट तथा कई तरह के ब्रश आदि की जरूरत है। जो विद्यालय निधि से उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। इस बिटिया में अपने घर, गांव, स्कूल से लेकर जिला एवं राज्य का नाम रौशन करने की प्रतिभा है। लेकिन अब उसे तत्काल संसाधन की जरूरत है। जो समय पर नहीं मिल पाया तो गरीबी के कारण संसाधनहीनता की वजह से कितनी कलाएं असमय मुरझा जाती हैं।
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इसी तरह से अंजलि की कला भी असमय काल कवलित हो जाएगी। और तब समय आने पर अंजलि की कहीं शादी कर दी जाएगी और इसकी प्रतिभा चूल्हा चौके की भेंट चढ़ जाएगी।

असहाय परिवार की बिटिया :-

अंजलि बहुत ही असहाय एवं गरीब परिवार की बेटी है। अंजलि के पिता सुनील राम 12 साल पहले तक मजदूरी किया करते थे। उसके बाद से उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। फलत: वे मजदूरी भी नहीं कर पाते। जबकि अंजलि की मां हृदय रोग से ग्रस्त हैं। इसी हालत में वे सिलाई करके अपना, पति एवं बेटी की परवरिश करती हैं। अंजलि का छोटा भाई अपने नाना के घर रहकर पढ़ाई करता है। अभी वह आठवीं कक्षा का छात्र है। इस प्रकार इस परिवार को सहयोग की विशेष दरकार है।

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अंजलि की कला को निखार देने के लिए किसी सहृदय व्यक्ति या सहयोगी संस्था की जरूरत है। जो उसे सहयोग करते हुए कैनवस, पेंट, विभिन्न प्रकार के ब्रश आदि समय-समय पर उपलब्ध करा सके। जिससे उसकी कला कहीं समय से पहले दम न तोड़ दे।
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