बरसात नजदीक आने से किसानों की बड़ी चिंता
किसानों के सामने संकट पर जनप्रतिनिधि व अधिकारी बेखबर
गढ़वा : सदर प्रखंड के नाल पक्की करण कार्य, करा रही केपीएल कंपनी के घटिया निर्माण एवं पक्की करण कार्य से जुड़े मजदूरों एवं ट्रैक्टर मालिकों की मजदूरी व भाड़ा, महीनों से भुगतान नहीं किए जाने से संबंधित लोग परेशान हैं।
बरसात का मौसम नजदीक देखकर किसान चिंतित है कि पक्की करण कार्य के दौरान कंपनी के द्वारा जिस प्रकार से कैनाल पक्की करण के कार्य जहां - तहां, जैसे - तैसे कराया गया है, इस वर्ष सिंचाई के लिए खेतों को पानी कैसे मिल पाएगा? इस पक्की करण काम से किसान छला सा महसूस कर रहे हैं। सोचे थे कैनाल का पक्की करण होने के बाद उन्हें सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी, पानी का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन पक्की करण कार्य के दौरान कंपनी के द्वारा कहीं कार्य को बीच में ही छोड़ दिए जाने, और जो निर्माण कराया गया है, वह इतनी घटिया है कि अभी से टूटने लगा है।
कई जगह तो पीसीसी टूट कर बिखर गया है। ऐसे में उसकी हालत कच्ची नहर से भी बदतर हो गई है।
यहां तक की कैनाल के पक्की करण के कार्य को पिछले काफी महीनों से जो बंद किया गया है, उसे अब तक चालू नहीं किया गया है। बरसात का मौसम नजदीक है, यदि आधे अधूरे कार्य को पूर्ण नहीं कराया गया तो किसानों को लेने के देने पड़ जाएंगे। सिंचाई की सुविधा तो नहीं ही मिलेगी उन्हें कैनाल में आने वाली अनियंत्रित पानी से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। वैसे भी कैनाल के पक्की करण कार्य कराने के लिए कंपनी के द्वारा सिंचाई की जो पुरानी व्यवस्था थी, उसे तहस नहस कर दिया गया है, और खेतों तक पानी ले जाने के लिए कहीं भी कैनाल में पानी निकासी की सुविधा नहीं है। जिससे किसानों के खेत तक पानी को ले जाए जा सके।
ऐसे में किसान के खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा? यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
ऊपर से मजदूरों एवं ट्रैक्टर मालिकों का लाखों रुपया, महीनों से मजदूरी तथा भाड़ा बकाया है। लॉकडाउन की अवधि में लोग बकाया राशि की भुगतान को लेकर परेशान है। हालत यह है कि कंपनी के इस कारनामे का शिकायत आखिर करें तो किससे करें? लोग असहाय हो ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जहां तक जनप्रतिनिधियों का प्रश्न है, किसानों मजदूरों एवं ट्रैक्टर मालिकों की इस बड़ी समस्या पर किसी ओर से गंभीरता नहीं दिखालाई जा रही है। लिहाजा सदर प्रखंड के अनराज नावाडीह डैम से जुड़े हजारों किसान की इस बड़ी समस्या के प्रति लापरवाही से संबंधित इलाके के लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है। जो किसी भी समय विस्फोटक रूप में उजागर हो सकता है।