गढ़वा : रमकंडा प्रखंड के उदयपुर पंचायत स्थित पुनदागा दुर्गा पूजा मैदान में झामुमो के कार्यकर्ता सम्मेलन सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया। गढ़वा विधायक और झारखंड सरकार के पेयजल, स्वच्छता, पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद व युवा कार्य विभाग के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं सहित लगभग 5000 लोगों ने झामुमो में शामिल होकर पार्टी की ताकत को और बढ़ाया। मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने इन लोगों को माला और पार्टी का पट्टा पहनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर पारंपरिक आदिवासी गीत और नृत्य के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
मंत्री ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि "ठग कर वोट लेना और जनता को अपने हाल पर छोड़ देना" पूर्व के जनप्रतिनिधियों का मुख्य काम था। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि रमकंडा में भाजपा अब पूरी तरह झामुमो में समाहित हो गई है, क्योंकि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को मान-सम्मान नहीं दे पा रही है।
मंत्री ने झामुमो की नीतियों और सरकार की योजनाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में रमकंडा में जितना विकास हुआ है, उतना आजादी के बाद से अब तक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि "यदि मुझे 10 या 17 साल का समय मिला होता और किसी ने 3 साल में मुझसे अधिक काम कर दिया होता, तो मैं कभी चुनाव नहीं लड़ता।
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उन्होंने मंईयां सम्मान योजना का भी उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार गरीब महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह दे रही है, जिसे विरोधी दल बंद कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यह योजना बंद नहीं होगी, बल्कि इसे बढ़ाकर 1250 रुपये और फिर 1500 रुपये कर दिया जाएगा।
मौके पर उमेश यादव, तपेश्वर सिंह खरवार सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए और आगामी विधानसभा चुनाव में मंत्री मिथिलेश ठाकुर को ऐतिहासिक जीत दिलाने की अपील की।
कार्यक्रम में झामुमो में शामिल होने वालों में उमेश यादव, राजेंद्र सिंह खरवार, रामप्रवेश यादव, चंदन प्रसाद, नागेश्वर तिवारी, धर्मदेव यादव, राजेश्वर यादव, रविंद्र विश्वकर्मा, खुर्शीद अंसारी सहित विभिन्न पंचायतों के प्रमुख लोग शामिल थे।
इस अवसर पर बीस सूत्री जिला उपाध्यक्ष नितेश सिंह, झामुमो जिलाध्यक्ष तनवीर आलम, सचिव मनोज ठाकुर, श्रवण कमलापुरी, शकुंतला देवी, और अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे।