बड़गड़ : अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, जो आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, भाषा, और दर्शन की रक्षा के लिए समर्पित एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, ने चुनावी राजनीति से सीधी भागीदारी से इंकार किया है। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी मिंज ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि महासभा का उद्देश्य आदिवासियों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना है, न कि चुनावी राजनीति में उतरना।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में महासभा के कुछ वरिष्ठ सदस्य केंद्रीय कमिटी के निर्णय और संगठन के संविधान का उल्लंघन करते हुए चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। ये सदस्य विभिन्न प्रखंडों में जाकर अपनी पार्टी की कमिटी का गठन कर रहे हैं और आदिवासियों को भ्रमित कर रहे हैं।
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श्री मिंज ने स्पष्ट किया कि अखिल भारतीय आदिवासी महासभा इंडिया गठबंधन को समर्थन करती है, और नई पार्टियां बनाकर आदिवासियों के हितैषी बनने का दावा करना दरअसल इंडिया गठबंधन का वोट काटने का षड्यंत्र है, जिससे एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ होगा।
महासभा के केंद्रीय सचिव फिलिप कुजूर ने भी इस संदर्भ में कहा कि महासभा का कोई भी सदस्य अपने नाम के साथ महासभा का नाम जोड़कर चुनाव नहीं लड़ सकता है। ऐसा करना संगठन के संविधान के खिलाफ है। यदि कोई सदस्य चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे महासभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।
केंद्रीय नेतृत्व ने आदिवासी समाज को सतर्क करते हुए कहा है कि वे इस तरह की नई पार्टियों के जाल में न फंसें और संगठन की मूल विचारधारा के साथ खड़े रहें।