गढ़वा : शुक्रवार को रंका में राजद की सभा काफी हद तक सफल कही जा सकती है। तेज गर्मी के बावज़ूद लोगों की बढियां उपस्थिति से तेजस्वी और मिथिलेश दोनों उत्साहित दिखे। यूं तो रंका से लालू प्रसाद और राजद का लगाव रहा है। हर चुनाव के दौरान लालू स्वयं रंका का कार्यक्रम तय कराते थे और संबोधन के दौरान स्व. गोपीनाथ सिंह से अपने संबंध की चर्चा करते। पर पिछले आम चुनाव के क्रम में गिरिनाथ सिंह ने अन्नपूर्णा देवी और जनार्दन पासवान के साथ अचानक लालू का साथ छोड़ भाजपा का झंडा उठा लिया।
बदलते घटनाक्रम में गिरिनाथ को भाजपा में स्वीकार्यता नहीं मिल सकी और उनकी अथक प्रयास और इच्छा के बावजूद न ही पार्टी ने चतरा से पार्लियामेंट का या न ही गढवा से असेंबली का सिंबल दिया।
पांच साल तक एकतरफा प्यार जताते-जताते, हारे हुए प्रेमी की तरह उन्हें फिर अपने पुराने घर में ही उम्मीद दिखा। पुराने साथियों से मिले और मन में सुप्रीमो से पुराने संबंध के दम पर दिल्ली दरबार पहुंचने की उम्मीद को पंख लगे।
लेकिन इन पांच साल में राजद के सुल्तान और निजाम भी बदल गये। गिरिनाथ को गर्मजोशी की जगह काफी ठंढे तौर पर इंट्री तो मिला लेकिन चतरा पार्लियामेंट्री सीट का टिकट नहीं। तकनीकि तौर पर अभी वे राजद के सदस्य हैं लेकिन चुनावी गतिविधियों से एकदम दूर।
रंका पैलेस उनका पैतृक घर है और आज रंका में राजद के नंबर 2 के नेता के कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति और कोई चर्चा भी नहीं होना काफी सवाल छोडता है।
आज की सभा में उपस्थित लोगों की भीड से मंत्री मिथिलेश गदगद हैं।
बडी संख्या में जुटे नेता और कार्यकर्ताओं को मंत्री मिथिलेश अपने खेमें में ले आने में सफल हुए हैं। पर मंच पर मौजूद गिरिनाथ सिंह के परिजन आधे से ज्यादा भीड़ को अपने कैंप का मान कर आत्ममुग्ध ही रहे।