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एक नज़र इधर भी

location_on नगर/रमना/भवनाथपुर/मेराल access_time 15-Oct-23, 06:11 PM visibility 731
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एक नज़र इधर भी


दिनेश/निरज/प्रथम/यासीन check_circle
संवाददाता



: कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र की प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना जिसमे प्रखंड मुख्यालय मां शायर देवी धाम सहित हासनदाग,कारकोमा गेरुआ बाना दुलदुलवा संगबरीया,गोबरदाहा दलेली बिकताम सहित कई जगहो पर आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोंचार के साथ कलश स्थापना किया गया। कलश स्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना किया गया हासनदाग देवीधाम मंदिर में वाराणसी से आए विद्वान श्री श्री 1008 विश्वाकांत पांडे उर्फ प्रमोद पांडे जी द्वारा वैदिक मंत्रोचार के साथ कलश स्थापना कराया गया तथा श्री दुर्गा सप्तशती एवं श्री रामचरितमानस सुंदरकांड कांड संपूठित पाठ किया जा रहा है। रात्रि में कई जगहों पर प्रवचन रामलीला तथा चलचित्र के माध्यम से रामायण सीरियल भी दिखाया जाएगा।
मां शायर देवी धाम के संचालन समिति के अध्यक्ष संजय भगत ने कहा कि इस बार भव्य तरीके से शारदीय नवरात्र का आयोजन बड़ी धूमधाम के साथ किया जा रहा है सभी श्रद्धालु भक्त इस भक्ति मय वातावरण में एक बार मां शायर देवी धाम दर्शन करने पहुंचे। इस मौके पर मां शायर देवी धाम के प्रांगण में मेराल पूर्वी पंचायत के मुखिया रामसागर महतो पश्चमी पंचायत के मुखिया पति मुन्ना राम कृष्ण प्रसाद कुशवाहा विनोद प्रसाद उर्फ लाला मनोज जायसवाल रंजीत कुमार चौबे इत्यादि उपस्थित थे। ईश्वर को पाने के लिए साधन की नहीं लगन की आवश्यकता होनी चाहिये :-श्री जीयर स्वामी जी महाराज। जब तक अहम् है, तब तक तत्त्वज्ञान का अभिमान तो हो सकता है, पर वास्तविक तत्त्वज्ञान नहीं हो सकता।
जब तक अपने में राग-द्वेष हैं, तब तक तत्त्वबोध नहीं हुआ है, केवल बातें सीखी हैं। तत्त्वज्ञान होने में कई जन्म नहीं लगते, उत्कट अभिलाषा हो तो मिनटों में हो सकता है; क्योंकि तत्त्व सदा-सर्वदा विद्यमान है।तत्त्वज्ञान अभ्यास से नहीं होता, प्रत्युत अपने विवेक को महत्त्व देने से होता हैं। अभ्यास से एक नयी अवस्था बनती है, तत्त्व नहीं मिलता। जब तक तत्त्वज्ञान नहीं हो जाता, तब तक सब प्राणी कैदी हैं । कैदीका लक्षण है – पाप कर्म करे अपनी मरजी से और दुःख भोगे दूसरेकी मरजी से।'मैं ब्रह्म हूँ' – यह अनुभव नहीं है, प्रत्युत अहंग्रह-उपासना है। इसलिये तत्त्वज्ञान होनेपर 'मैं ब्रह्म हूँ' – यह अनुभव नहीं होता।तत्त्वज्ञान होने पर काम-क्रोधादि विकारों का अत्यन्त अभाव हो जाता है।
कालरूप अग्नि में सब कुछ निरन्तर जल रहा है, फिर किसका भरोसा करें? किसकी इच्छा करें? विचार करो कि अपना कौन है ? अगर अभी मौत आ जाय तो कोई हमारी सहायता कर सकता है क्या ? जन्मदिन आने पर बड़ा आनन्द मनाते हैं कि हम इतने वर्ष के हो गये! वास्तव में इतने वर्ष के हो नहीं गये, प्रत्युत इतने वर्ष मर गये अर्थात् हमारी उम्रमें से इतने वर्ष कम हो गये और मौत नजदीक आ गयी !बालक जन्मता है तो वह बड़ा होगा कि नहीं, पढ़ेगा कि नहीं, उसका विवाह होगा कि नहीं, उसके बाल-बच्चे होंगे कि नहीं, उसके पास धन होगा कि नहीं आदि सब बातों में सन्देह है, पर वह मरेगा कि नहीं - इसमें कोई सन्देह नहीं है!परमात्मतत्त्व का ज्ञान करण-निरपेक्ष है। इसलिये उसका अनुभव अपने-आपसे ही हो सकता है, इन्द्रियाँ - मन-बुद्धि आदि करणों से नहीं।
जब तक नाशवान् वस्तुओं में सत्यता दीखेगी, तब तक बोध नहीं होगा।बोध होने पर अपने में दोष तो रहते नहीं और गुण (विशेषता) दीखते नहीं।मृत्युकाल की सब सामग्री तैयार है । कफन भी तैयार है, नया नहीं बनाना पड़ेगा। उठानेवाले आदमी भी तैयार हैं, नये नहीं जन्मेंगे। जलाने की जगह भी तैयार है, नयी नहीं लेनी पड़ेगी जलाने के लिये लकड़ी भी तैयार है, नये वृक्ष नहीं लगाने पड़ेंगे। केवल श्वास बन्द होने की देर है । श्वास बन्द होते ही यह सब सामग्री जुट जायगी। फिर निश्चिन्त कैसे बैठे हो ?चेता करो! यह संसार सदा रहनेके लिये नहीं है। यहाँ केवल मरनेवाले हीं रहते हैं। फिर पैर फैलाये कैसे बैठे हो? विचार करो, क्या ये दिन सदा ऐसे ही रहेंगे? निश्चित समय पर चलने वाली गाड़ी के लिये भी जब पहले से सावधानी रहती है, फिर जिस मौतरूपी गाड़ी का कोई समय निश्चित नहीं, उसके लिये तो हरदम सावधानी रहनी चाहिये ।
मकान यहाँ बना रहे हो, सजावट यहाँ कर रहे हो, संग्रह यहाँ कर रहे हो, पर खुद मौत की तरफ भागे चले जा रहे हो! जहाँ जाना है, पहले उसको ठीक करो !‘करेंगे'—यह निश्चित नहीं है, पर 'मरेंगे' – यह निश्चित है।आप भगवान्को नहीं देखते, पर भगवान् आपको निरन्तर देख रहे हैं. प्रखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों में रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का प्रथम दिन शुरू हुआ। इस अवसर पर विभिन्न पूजा पंडालों, मंदिरों एवं घरों में लोगों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि पूर्वक कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती व नवाह परायण पाठ का शुभारंभ किया। शारदीय नवरात्र प्रारंभ होते ही पूरा इलाका भक्ति के वातावरण से ओतप्रोत हो गया है। रमना में श्री सीताराम मानस मंदिर में नव दिवसीय नवाह् परायण पाठ तथा श्री रामदरबार का आयोजन किया गया है।
इसके पहले मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष विरेद्र प्रसाद गुप्ता तथा राम दरबार आयोजन समिति के नेतृत्व कलश यात्रा निकली जो मुख्यपथ,हरिगणेश मोड़,शहीद भगत सिंह चौक होते सुखड़ा नदी पहुंची जहां वैदिक मंतरोचार से विद्वान ब्रह्मणों के द्वारा जल संक्लप कराया गया।संकल्पित जल को मंदिर परिसर में स्थापित कराने के बाद नवाह्न परायन यज्ञ आरंभ हुआ।कलश यात्रा में अशर्फी लाल,विरेंद्र पाठक,रामकुमार चंद्रवंशी,दिनेश्वर सिंह,ललीत किशोर,रिशु,चंदन,सहीत कई लोग शामिल हुए गढ़वा पुलिस अधीक्षक दीपक पाण्डेय के निर्देश पर भवनाथपुर थाना परिसर में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। थाना प्रभारी रामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता व प्रशासन के बीच की खाई को मिटाते हैं।
इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों से नवरात्र पर्व को शांति व सौहार्दपुर्ण वातावरण में संपर्क करने के लिए सहयोग की अपील की साथ ही साथ उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ विचार व सुझाव भी साझा किया।




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