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एक नज़र इधर भी

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एक नज़र इधर भी


गढ़वा check_circle
संवाददाता



गढ़वा : स्वास्थ्य मेला भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थकेन्द्र में प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य मेला का दूसरा चरण में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रंजन कुमार दास ने फीता काटकर किया गया मेला में मरीज के लिए विशेष सुविधा का इंतजाम किया गया है इसमें तत्काल 140 लोंगो का आयुष्मान कार्ड बनाया गया जिसमें साहियावो के मदद से छूटे सभी ग्रामीण क्षेत्र के लोंगो को आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य दो अक्टूबर तक रखा गया है ।वन्ही ओपीडी में कुल 273लोंगो का इलाज किया गया ।स्वेक्षिक रक्त दान शिविर में कुल 12 यूनिट रक्त लिया गया जिसकी सुरुवात चिकित्सा पदाधिकारी रंजन दास ने एक यूनिट देकर सुरुवात किया।इसके बाद बीएसएल के सुरक्षा कर्मी सीआईएसएफ के जवान ,केतार थाना के ऐस आई संजय हेम्ब्रम ,युवा व समाज सेवी नित्यानन्द पाठक ने 18वें बार रक्त दान किया ।
इस मौके पर डॉ नीतीश भारती ,डॉ अभिनीत विश्वास , गढवा के एमपी डब्लू प्रदीप कुमार ,जी प्रसाद ,प्रदीप पाठक ,अनुज कुमार ,अनूप कुमार ,धर्मजीत पासवान सहित कर्मी सामिल थे । घायल ं गढ़वा विंधमगंज मार्ग पर महदईया गांव के पास मोटरसाइकिल दुर्घटना में मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए घायलों में उत्तर प्रदेश के चोपन थाना क्षेत्र के रमबहादुरपुर गांव निवासी सीताराम पाल का पुत्र धर्मेंद्र पाल एवं दुद्धी थाना क्षेत्र के करी गांव निवासी छठन पाल का पुत्र विनय पाल के नाम शामिल है दोनों को इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया है घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि दोनों एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर उत्तर प्रदेश के कड़ी गांव से मेदनी नगर अपने रिश्तेदारी में जा रहे थे इसी दौरान नगर ऊंटरी थाना क्षेत्र के महदईया गांव के पास मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया इसके बाद आसपास के लोगों ने दोनों को इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया आत्म हत्या का प्रयास रमना थाना क्षेत्र के मड़वानिया गांव निवासी प्रमोद सिंह का पुत्र सत्यनारायण सिंह कीटनाशक खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया उसे इलाज के लिए गठवा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया है घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि सतनारायण सिंह की पत्नी अपने मायके नगर ऊंटरी थाना क्षेत्र के गठियरवा गांव के गई हुई थी काफी दिन बीत जाने के बाद उसे लाने गया तो उसकी पत्नी उसके साथ आने से इनकार कर दिया इसी बात से आक्रोशित होकर सत्यनारायण सिंह ने सब्जी में डालने वाली कीटनाशक दवा खा लिया घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने उसे सदर अस्पताल में भर्ती करवाया ज़ख्मी गढ़वा थाना क्षेत्र के भररिया गांव निवासी विनोद रजवार की पुत्री मंजू कुमारी सांप काटने से जख्मी हो गई उसे इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया है घटना के संबंध में परजीवनी बताया कि मंजू कुमारी शुक्रवार की सुबह जंगल में लकड़ी काटने गई हुई थी इसी दौरान उसके बाएं हाथ में सांप ने काट लिया घटना की जानकारी मिलने के बाद पार्जन उसे आनन फानन में गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती करवाया मारपीट गढ़वा जिले के मेराल गांव में भूमि विवाद को लेकर हुई मारपीट की घटना में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई घायल महिला तसमुद्दीन अंसारी की पत्नी हाजरा बीवी बताया गया है उसे इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया है घटना के संबंध में परिजनो ने आरोप लगाया है कि हाजरा बीवी के गोतीया मकसूद अंसारी के हाथों अपने हिस्से के जमीन से ज्यादा बेच दिया इसके बाद हाजरा बीवी के बंधा हुआ घर का पीलिंथ को अपना भूमि बताकर मकसूद अंसारी के परिवार के लोग हाजरा बीवी को मारपीट का घायल कर दिया परिजनों ने उसे सदर अस्पताल में भर्ती करवाया बीमार गढ़वा जिले के चिड़िया गांव निवासी प्रमोद कुमार रवि का पुत्र अंकुश कुमार 8 वर्ष ने ओवरडोज दवा खाकर बीमार हो गया उसे इलाज के लिए गठवा सदर अस्पताल में भर्ती किया गया है घटना के संबंध में परिजनो ने बताया कि घर में पेट कि कीड़ा मारने की दवा रखा हुआ था अंकुश कुमार ने उसमे से निकाल कर खा गया इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजन उसे सदर अस्पताल में भर्ती करवाया कुछ चाहने से कुछ मिलता है और कुछ नहीं मिलता, परन्तु कुछ भी नहीं चाहने से सब कुछ मिलता है:- श्री जीयर स्वामी जी महाराज निन्दा इसलिये बुरी लगती है कि हम प्रशंसा चाहते हैं।
हम प्रशंसा चाहते हैं तो वास्तवमें हम प्रशंसाके योग्य नहीं हैं; क्योंकि जो प्रशंसा के योग्य होता है, उसमें प्रशंसाकी चाहना नहीं रहती।सांसारिक सुखकी इच्छाका त्याग कभी-न-कभी तो करना ही पड़ेगा तो फिर देरी क्यों? जहाँतक बने, दूसरोंकी आशापूर्तिका उद्योग करो, पर दूसरोंसे आशा मत रखो। दूसरों से अच्छा कहलाने की इच्छा बहुत बड़ी निर्बलता है। इसलिये अच्छे बनो, अच्छे कहलाओ मत ।मनुष्यको कर्मोंका त्याग नहीं करना है, प्रत्युत कामनाका त्याग करना है। मनुष्यको वस्तु गुलाम नहीं बनाती, उसकी इच्छा गुलाम बनाती है। यदि शान्ति चाहते हो तो कामनाका त्याग करो।कुछ भी लेनेकी इच्छा भयंकर दुःख देनेवाली है।जिसके भीतर इच्छा है, उसको किसी-न-किसीके पराधीन होना ही पड़ेगा।
अपने लिये सुख चाहना आसुरी, राक्षसी वृत्ति है।जैसे बिना चाहे सांसारिक दुःख मिलता है, ऐसे ही बिना चाहे सुख भी मिलता है। अतः साधक सांसारिक सुखकी इच्छा कभी न करे। भोग और संग्रहकी इच्छा सिवाय पाप करानेके और कुछ काम नहीं आती। अतः इस इच्छाका त्याग कर देना चाहिये अपने लिये भोग और संग्रहकी इच्छा करनेसे मनुष्य पशुओंसे भी नीचे गिर जाता है तथा इसकी इच्छाका त्याग करनेसे देवताओंसे भी ऊँचे उठ जाता है जो वस्तु हमारी है, वह हमें मिलेगी ही; उसको कोई दूसरा नहीं। विचार करो, जिससे आप सुख चाहते हैं, क्या वह सर्वथा सुखी है? क्या वह दुःखी नहीं है? दुःखी व्यक्ति आपको सुखी कैसे बना देगा? कामना छूटनेसे जो सुख होता है, वह सुख कामनाकी पूर्तिसे कभी नहीं होता।
परमात्माकी उत्कट अभिलाषा चाहते हो तो संसारकी अभिलाषाको छोड़ो।जो बदलनेवाले (संसार) की इच्छा करता है, उससे सुख लेता है, वह भी बदलता रहता है अर्थात् अनेक योनियोंमें जन्मता-मरता रहता है।जिसको हम सदाके लिये अपने पास नहीं रख सकते, उसकी इच्छा करनेसे और उसको पानेसे भी क्या लाभ ? कामनाके कारण ही कमी है। कामनासे रहित होनेपर कोई कमी बाकी नहीं रहेगी।कामनाका सर्वथा त्याग कर दें तो आवश्यक वस्तुएँ स्वतः प्राप्त होंगी; क्योंकि वस्तुएँ निष्काम पुरुषके पास आनेके लिये लालायित रहती हैं ।जो अपने सुखके लिये वस्तुओंकी इच्छा करता है, उसको वस्तुओंके अभावका दुःख भोगना ही पड़ेगा।जीवन तभी कष्टमय होता है, जब संयोगजन्य सुखकी इच्छा करते हैं और मृत्यु तभी कष्टमयी होती है, जब जीनेकी इच्छा करते हैं यदि वस्तुकी इच्छा पूरी होती हो तो उसे पूरी करनेका प्रयत्न करते और यदि जीनेकी इच्छा पूरी होती हो तो मृत्युसे बचनेका प्रयत्न करते।
परन्तु इच्छाके अनुसार न तो सब वस्तुएँ मिलती हैं न और न मृत्युसे बचाव ही होता है इच्छाका त्याग करनेमें सब स्वतन्त्र हैं, कोई पराधीन नहीं है और इच्छाकी पूर्ति करनेमें सब पराधीन हैं, कोई स्वतन्त्र नहीं है सुखकी इच्छा, आशा और भोग- ये तीनों सम्पूर्ण दुःखोंके कारण हैं।नाशवान्की चाहना छेड़नेसे अविनाशी तत्त्वकी प्राप्ति होती है ऐसा होना चाहिये, ऐसा नहीं होना चाहिये - इसीमें सब भरे हुए हैं ।हमारा सम्मान हो— इस चाहनाने ही हमारा अपमान किया है।मनमें किसी वस्तुकी चाह रखना ही दरिद्रता है।




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