मेराल :
-श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र जी के अनुयायियों द्वारा जंगीपुर स्थित सत्संग उपासना केन्द्र उर्जितपा के प्रांगण में सत्संग का आयोजन किया गया.
सत्संग का शुभारंभ बन्देपुरुषोतम ध्वनि व शंख ध्वनि के बीच दीप प्रज्वलित कर किया गया.इसके बाद सतनाम जप,सत्यानु शरण पाठ व नारी नीति का पाठ किया गया.इष्टचर्चा करते हुये सत्संगी राजकुमार ने कहा कि सत्संग जगत में दो सितम्बर का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि दो सितंबर 1946 को श्री श्री ठाकुर जीअपने कुछ शिष्यों के साथ देवघर आये थे.इसके बाद उन्होंने सत्संग नगर का निर्माण किया.उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष दो सितंबर कोआगमनी दिवस के रूप में मनाया जाता है.उन्होंने कहा कि वर्तमान पुरुषोत्तम में सभी देवी देवताओं का वास होता है.जगत के कल्याण के लिये समय समय पर मानव रूप में पुरुषोत्तम आते हैं.सत्संगी माला देवी ने कहा कि श्री श्री ठाकुर जी अवतारी मानव हैं.उनके द्वारा प्रदत्त नाम का अनवरत जाप करना चाहिये.कलियुग के लिये ईश्वर का नाम ही एक आधार है.इस नाम का स्मरण करने से ही मानव का कल्याण सम्भव है.ऋत्विक धृतिसुन्दर लाल ने भी सत्संग व नाम की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुये उसके प्रभाव का वर्णन किया.आगामी 5 नवम्बर को श्री श्री ठाकुर जी के उत्सव को सफल बनाने के लिये तथा उस पर होने वाले कार्यक्रमों की चर्चा किया.सत्संग में शक्तिदास सिन्हा,अजय दा,श्रीकांत लाल,आयुष कुमार,शिवम कुमार,पीयूष कुमार,रीना जायसवाल, संध्या देवी,निर्मला जायसवाल,प्रभा देवी,प्रमिला देवी,आकांक्षा,रानी सहित अन्य उपस्थित थे.