बंशीधर नगर :
अनुमंडलीय पेंशनर समाज के कार्यसमिति की बैठक पेंशनर समाज के कार्यालय में समाज के अध्यक्ष गदाधर पांडेय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई.बैठक में नगर उंटारी, खरौंधी,धुरकी व भवनाथपुर से 7 सदस्यों को शामिल किया गया.पेंशनर समाज द्वारा किये गये खर्च का अंकेक्षण कराया गया तथा ,अनुमोदन के लिये प्रस्तुत किया गया.बैठक में कार्यसमिति की बैठक प्रत्येक तीन माह पर कराने ,पेंशनरों की समस्याओं का समाधान कराने के लिये प्रत्येक माह के एक से सात तारीख तक कार्यालय खुला रखने,15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कार्यालय पर 9.30 बजे झंडोत्तोलन करने का निर्णय लिया गया.बैठक में संरक्षक मण्डल के सदस्य शारदा महेश प्रताप देव,राम परिखा सिंह,विजय शंकर चौबे,सचिव शिवशंकर प्रसाद,उप सचिव सह कोषाध्यक्ष रामानंद पांडेय,कार्यालय सचिव शिवनारायण चौबे,गोपाल चौबे,राजकेश्वर महतो,रामाधार दुबे,कमलेश्वर पांडेय,यदुवर राम,सुदर्शन प्रसाद,जय गोविंद सिंह,हरिशंकर चौबे,सुदर्शन राम चंद्रवंशी,राजेश कुमार यादव,गोपाल राम,भरत चौबे,रालखन शुक्ल,जय किशोर शुक्ल,विंध्याचल शुक्ल,उदयचंद तिवारी सहित अन्य उपस्थित थे. बैठक का संचालन पेंशनर समाज के सचिव शिवशंकर प्रसाद ने किया.

मानव योनि दुर्लभ है इससे व्यर्थ में बर्बाद ना करें :- जीयर स्वामी
श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने लोगों को समझाते हुए कहा कि हरि कृपा से मानव योनी मिलता है इसे व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
जितना हो सके संसार से मोह माया त्याग पर हरि के भजन में अपना समय लगाना चाहिए। संसार में रहते हुए अपने तथा अपने परिवार के पालन पोषण में भी समय देना चाहिए यह भी अनिवार्य है।संसार का नियम है। लेकिन ईश्वर की भक्ति बी इसी नियम के अंतर्गत आता है।श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान के भक्तों का अपमान नहीं करना चाहिए। इससे समस्त कुल का नाश हो जाता है। क्योंकि भगवान अपना अपमान सह लेते हैं लेकिन भक्तों का अपमान सहन नहीं करते हैं। वैसे तो किसी का भी अपमान नहीं करना चाहिए।मानव योनि दुर्लभ है इसमें बड़े सोच समझकर कोई भी कार्य करना चाहिए। भले ही अच्छा कार्य ना हो पाए लेकिन बुरा कार्य नहीं करना चाहिए। किसी का भला नहीं कर पाए तो बुरा भी नहीं करना चाहिए।
जहां तक हो सके सबसे आदर पूर्वक बात करनी चाहिए। संत महात्मा तथा द्वार पर आए हुए अतिथि का भरपूर सम्मान करना चाहिए।
भगवान के भक्तों का अपमान करना यह भगवतापचार है। दुसरा भागवतापचार इसमें भगवान के साथ अपमान है। यह भी पाप है। हम मुर्ति की नही मुर्ति में पूजा करते हैं। तीसरा है अतितकरण अपचार इसमे जो शास्त्र में निषेध किया गया काम जो करता है यह भी पाप है। क्या करें क्या न करे पुस्तक सभी को पढ़ना चाहिए। चौथा है कृतकर्म अपराध। जो शास्त्र में बताने के बाद भी हम नही करते हैं जैसे शास्त्र में बताया गया है कि स्नान करके ही खाना बनाना चाहिए यदि ऐसा नही करते हैं तो यह भी पाप है। जहां भोजन बनता है वह भी देवालय है। पांचवा है असह्य अपराध जो शास्त्र में धर्म बताया गया वह नही करते हैं जैसे नया नया पंथ संप्रदाय निकालना भी पाप है।
गाय को कसाई के यहां बेचने वाला महापापी है।
जो सदाचारी विप्रों इत्यादि की हत्या करता है,उसको धोखा देता है, उससे कपट करता है। उसको महापापी कहा गया है। दुसरा महापापी है गोघाती जो गाय को कसाई के यहा बेचता है। और कसाई से उसको पहचान है या सम्पर्क है। वह भी महापापी है। शास्त्र में गोघाती भी कहा गया है। तीसरा है विश्वासघाती रात दिन मैत्री है थोड़ी सी बात में अपने मित्र से परिवार से विश्वासघात कर दिया उसे भी महापापी कहा गया है। मद्यसेवी यानी शराब पीने वाला व्यक्ति भी महापापी है। चौथा है गुरू पत्नी गामी वैसा व्यक्ति जो बहन के समान, गुरू पत्नी के समान, बेटी के समान, माता के समान, चाची के समान, फुआ के समान के औरतों को लालच देकर, प्रलोभन देकर बहकाकरके अनुचित व्यवहार करता है वह महापापी कहा गया है। परंतु भागवत कथा सुनने से उसका भी उद्धार हो जाता है।