बंशीधर नगर :
अलग-अलग कर्मों के अनुसार अलग-अलग दण्ड भोगना पड़ता है। जैसा जीव अपराध करता है, कर्म करता है, उसके अनुसार उस उस तरीके से दण्ड दिया जाता है। दण्ड का प्रावधान किया जाता है। यदि हमारे द्वारा अपचार हो जाए, अपराध हो जाए। तो समय रहते उसका प्रायश्चित कर लें। यदि प्रायश्चित नही करते हैं तो बाद में उस पाप का, अपराध का दण्ड भोगना पड़ता है। वहीं व्यक्ति अपने जीवन में दण्ड का अपचार हो गया। अगर उस व्यक्ति ने मार्जन नही किया। तो नरक में जाता है।
दक्षिण दिशा की ओर घर का दरवाजा नही बनाना चाहिए।
शास्त्रों मे बताया गया है कि दक्षिण दिशा की ओर घर का दरवाजा नही बनाना चाहिए। क्योंकि दक्षिण दिशा की ओर ही नरक है। प्रायः लोग दक्षिण दिशा की ओर मुख्य दरवाजा नही रखते हैं।
जिनके पास जमीन कम है। मजबूरी है कि दरवाजा दक्षिण की ओर हीं रखेंगे। वह परमात्मा का नाम लेकर हीं आते जाते हैं।
नही चाहने के बाद भी मच्छर जैसे जीव मार दिए जाते हैं उनका प्रायश्चित हो जाता है।
हमारे द्वारा मक्खी, खटमल, मच्छर, नही चाहते हुए भी मार दिए जाते हैं। पाप हो जाता है। हमारा उद्देश्य उनको मारने में नही था। परेशान करने में नही था। खेती कर रहे हैं। अनेक प्रकार के जीव को नही चाहते हुए भी मार दिया जाता है। ऐसे पापों का प्रायश्चित उपर उपर हो जाएगा।
पराये धन का हरण करने वाला व्यक्ति को मिलता है तामिस नरक।
जो व्यक्ति पुरूष या स्त्री पराये समझा करके, दिग्भ्रमित करके पराये धन का, पराया पुरूष, स्त्री का हरण करता है ऐसे लोगों को तामिस नामक नरक मिलता है।
इस नरक में ऐसे लोगों को काल पास में बांधकर इस नरक में ले जाया जाता है।
पंच भौतिक शरीर ही समाप्त होता है।
एक शरीर होता है भोग शरीर, एक होता है सुक्ष्म शरीर, एक होता है स्थुल शरीर, एक होता है पंचभौतिक शरीर। पंच भौतिक शरीर ही समाप्त होता है।