मझिआंव : उपायुक्त के निर्देशानुसार रेफरल अस्पताल में नवजात मृत शिशु को आंग में डालने की प्रकरण की मामले को लेकर बीडीओ ने जांच पड़ताल की । जांच शिवपुरा स्वास्थ्य महकमा कटघरे में है यहां तक कि चिकित्सक की भूमिका भी संदिग्ध पाया गया।
जांच के दौरान रेफरल अस्पताल में 12जून एवं 13जून को सोमवार एवं मंगलवार को लगातार 2 दिनों तक एक-एक बिंदु पर जांच पड़ताल बारीकी से की गई। जांचो उपरांत बीडीओ श्री भास्कर ने बताया कि दोनों नर्स एवं दाई हर हाल में दोषी हैं जो जेल चले गए। इसके बाद उन्होंने प्रशव से संबंधित काफी त्रुटियां पाई,उन्होंने यह भी बताया कि प्रशव कक्ष में हर हाल में महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति अति अनिवार्य होनी चाहिए,वही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मदन लाल तनान के द्वारा भी काफी लापरवाही पाया गया।
जो प्रसव कराने आए प्रसूता के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी नहीं ली। साथ ही उन्होंने बताया कि उक्त मरीज को 10 जून को 12:10 में भर्ती किया गया था, जिसे प्रसूता मधु देवी का नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्होंने 2:10 में रेफर कर दिया गया था यहां तक की 108 एंबुलेंस गढ़वा से रेफरल अस्पताल के लिए चल भी दी थी कि इसी दौरान 2:20 में प्रसूता का बच्चा जन्म लिया जिस एंबुलेंस को बीच रास्ता से वापस करा दिया गया। परंतु मानवता शर्मसार करने वाली बात यह है कि मृत बच्चा के परीजन दफनाने के लिए कपड़ा लेने बाजार गए हुए थे और इधर बिना सूचना दिए ही परिजनों को उस मृत बच्चा को कचरा के जलती आग के गटर में डाल दिया गया ।जो मानवता को शर्मसार करने वाली बात हुई। साथ ही उन्होंने बताया कि मधु देवी प्रसूता का नियम संगत प्रशव 25/9 /23 को होना था, जो 10 जून को हुआ, साथ ही उन्होंने प्रसूता मधु देवी के मायके नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 6 लोहार पुरवा गांव स्थित हरीकिशोर विश्वकर्मा के यहां भी उन्होंने जाकर हाल खबर लेना चाहा परंतु परिजनों के द्वारा बताया गया कि वह बोलने की स्थिति में नहीं है बेहोशी की हालत में अभी भी है।