बंशीधर नगर : - प्रवचन के प्रथम दिन सोमवार को श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने चातुर्मास व्रत के संबंध में विस्तृत व्याख्या किया। समाज कल्याण के लिए चातुर्मास व्रत से समााज व राष्ट्र का कल्याण होता हैै।

आचार्य की व्याख्याा करते हुए कहा कि आचरण से संपन्न व्यक्ति ही आचार्य होता है। उदाहरण देते हुए कहा कि रावण केेे पास सब कुछ था पर आचरण नहीं था जिसके कारण उसका समूल नाश हो गया। विभीषण के पास सभी चीजोंं का अभाव था। पर आचरण व संस्कार होने के कारण भगवत कृपा प्राप्त हुई। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि व राजा समाज व राष्ट्र के कल्याण के लिए चातुर्मास व्रत करते थे। भक्तों को समझाते हुए कहा कि पत्नी, घर व परिवार छोड़ने वाले को हो सकता है कि कभी परिवार, घर व पत्नी पर मोह आ भी सकता है।
पर अपने परिवार में रहते हुए परमात्मा से अपना जीवन जोड़ने वाले को कहीं भटकने की गुंजाइश नहीं रहती है। यही गृहस्थ के लिए सर्वश्रेष्ठ, सबसे सरल और सहज उपाय है। परिवार, पत्नी व बाल-बच्चे में अपने आप स्थित होते हुए घर में परमात्मा की सत्ता, कारण एवं आज्ञा मान करके उनके साथ रहें। स्वामी जी ने कहा कि परमात्मा की कथा श्रवण करने से चंचल मन भी गलत मार्ग पर नहीं जाता है। वह परमात्मा जो पूरे दुनिया में है, पूरे दुनिया की स्थिति में है, ऐसे को जान करके उनके नाम, गुण, लीला, धाम तथा उनके चरित्र को सुनिए। सबसे पहले सुनिए फिर कीर्तन व स्मरण करिए, तब उनके गुणों को अपने हृदय में उतारिए।