भंडरिया(गढ़वा) : प्रखंड मुख्यालय स्थित वनवासी कल्याण केंद्र कार्यालय में आदिवासी सनातन धर्म को लेकर प्रखंड के बैगा, पाहन आदि की बैठक की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड प्रांत के धर्म जागरण प्रमुख रामजी उराँव ने कहा कि आदिवासी सनातन धर्म को तोड़फोड़ कर विभाजन करने से रोकने के लिए विशेष रूप से हम सबको चर्चा करने की आवश्यकता है। उपस्थित बैगा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अंतर्गत आदिवासी मूलवासी के प्रमुख धरोहर बैगा, पाहन तथा मुख्य लोगों को अपने मूल संस्कृति और धर्म को बचाए रखने की आवश्यकता है। कई तथ्यों से पता चलता है कि अन्य धर्म संपदा के लोग मूल रूप से आदिवासी लोगों के सरना स्थल को उसके धार्मिक स्थल ना बताकर धर्म बताने की साजिश कर रहे हैं।
जिससे मूल आदिवासी अपने इतिहास से भटक जाए और आपस में ही लड़ बैठे। सरना स्थल आदिवासियों का धार्मिक स्थल है ना कि सरना धर्म है। हमारी संस्कृति सरना है, हम प्रकृति पूजक हैं, किंतु धर्म सनातन ही है। भारत में होने वाले जनगणना के दौरान उनके धर्म और संस्कृति को हटाकर उनके स्थल के रूप में कोड मांगने के लिए आदिवासियों को उकसाया जा रहा है। जिससे उनके धर्म का हनन हो और यह कार्य आदिवासियों के द्वारा ही कराने का साजिश रचा जा रहा है। इसलिए सभी सनातन धर्म के मूल आदिवासी राष्ट्र जनों से अपील है कि आने वाले 2021 के जनगणना में स्वयं को अपने भारत राष्ट्र से जोड़कर अपना धर्म सनातन धर्म बताएं जिससे भारत और आप खुद सुदृढ़ हों। साथ ही आने वाली पीढ़ी हम पर गर्व कर सकें और हम सभी सनातन मूलवासी कहलाएँ।
मौके पर कई वक्ताओं ने सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए उपस्थित लोगों को संबोधित किया। बैठक में मुख्य रूप से झारखंड राज्य आदिवासी हित रक्षा प्रमुख सुमन उरांव, सुरेश सिंह, योगेंद्र प्रसाद, रंजय सिंह, अंबिका सिंह, रामचंद्र सिंह, उदेश्वर सिंह, वैजनाथ सिंह सहित दर्जनों बैगा आदि मौजूद थे।