न सत्ता का सुख, न विपक्ष की मजबूरी।
न केउ से दोस्ती न केहू से बैर।
दोस्तों, एक खांटी गढ़वा वासी, न भक्त न चमचा, सिर्फ विचारक, उमड़ते घुमड़ते-अदलते बदलते विचारों की खिचड़ी,
गढ़वा के खबरों का विचारक एवम उधेड़क, आपका अपना
विचारनेमि।
संदर्भ - गढ़वा में कोरोणा।
हमहूं कोरोणा, तूंहूं कोरोणा
सारा जग कोरोणा-कोरोणा
दादा दादी हो, भईया भाभी हो सुनल गढ़वो बढ़का शहर हो गलव। एक बार त रांची के भी फेल कर देले रहव। का चीज में रे, का में फेल करलई रे। अरे उहे कोरोणा बीमरिया में हो। अब जानल.. रमकलिया मौसी के घोरानी ला एतवरिया काकी से लड़ाई हो गलव। एतवरिया काकी ओकरा गारी दे देलई। कहलई तोर सवांग के कोरोणा होखो। अब का कहिव, एतवरिया काकी के सवांग रामखेलावन काका के कोरोणा हो गलईन।
तोरा त पते होतव। अब दूनों में खुबे मथफुटव्वल होत हव। अरे काका का बतइव गढ़वा के हाल इ कोरोणा कवनो के नखउ पहचानत। का अमिर का गरीब। कल तक भवनाथपुर, मेराल, खरौंधी, कोरवडीह देने कोरोणा रहव। लोग सोचत रहथूं कि गांव देहात में बा। उ भी बाहरे से आइल मजदूर में। हमनी के का डर बा। एतने में बढ़का धमाका होलव कचहरी रोड में भी एके घर में हड़ास से तीन गो। बाप, बेटा के साथ अपने बढ़का भईया संक्रमित हो गलथूं। अब समझ तूं भी सुरक्षित नईख। काहे से कि बढ़का भईया के बड़े-बड़े अमदिन के साथ उठना बैठना हई। त अब खोजत रह उनका साथे रहे वाला के। प्रशासन और साहेब लोग के पसेना छूटत हव। खोजले चलत हथूं कि भाई रउओ संपर्क में रही भईया के? भला बताव कोई बतावत बा, कोई कहते नईखे।
जेकरा कल साथे गाड़ी में घुमत देखले रहन सब लोग उहो कहत हथी कि हम त केतना दिन से देखले भी नईखी।
अब गढ़वा के लोग के उ नदी किनारे आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र रख के कोरोणा माई के पूजा करे वाली माता जी लोग ही बचा सकलीन। लेकिन उ हों त सटले तो गेले बेटा वाला हाल हव। सब माता जी लोग कोरोणा माई के पूजा करके उनका भगावे के जगह बुलावे के व्यवस्था करत बड़िन। अब आप सबन से एक हथजोरी बिनती, यदि भईया या कोई कोरोणा संक्रमित के संपर्क में आइल ही त भगवान के खातिर, गढ़वा जिला के आपन भाई- बहन के खातिर, अपन बाल-बच्चा और परिवार के खातिर आपन जांच कराउं और कम से कम 14 दिन घरे चाहे सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर के क्वारेंटाइन हो जाउं। हथजोरी बिनती बा।
त नाम जाहिर न होखे से विपक्षी खुल के बोलहु न पावत बड़े।
बोलहुँ के न चाही, बीमारी आउ आफत भक्त आउ चमचा देख के ना आवे। भाषा पे संयम रखी रउवा लोग।
समय कोरोणा काल बा,
गढ़वा में बवाल बा,
कुछ सत्ता त कुछ विपक्षी के सवाल बा,
जनता डर आउ गर्मी से बेहाल बा।
करोणा फाइटर के करूँ प्रणाम,
बड़े उ हाई प्रोफाइल ना लिह नाम,
सेवा करते जो होइलन ग्रसित,
काहे उनका लोग करे बदनाम।
विचार के बात ई बा के मजूरा दुखियारी के सेवा करते बड़का भैया से सटल कोरोणा, त एकरा में भइया के बड़प्पने बा, कौनो बदनामी जा कलंक के त बात नइहे बा। जरा सी लापरवाही आउ दुर्भाग्य। ईश्वर उनका और पूरा परिवार के जल्दी ठीक कर देवे इहे प्रार्थना बा।