गढ़वा :
उपायुक्त गढ़वा रमेश घोलाप की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के तहत प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान 2025 में सामुदायिक भागीदारी हेतु जनसहभागीता की बैठक
अनुमंडल पदाधिकारी नगर उंटारी, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी व कर्मी, जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद सदस्यों तथा प्रखंड प्रमुख व एनजीओ के प्रतिनिधियों के साथ संपन्न हुई।
इस योजना के अंतर्गत सभी यक्ष्मा मरीजों को पोषाहार हेतु इलाज पूर्ण होने तक ₹500 प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दी जाती है। देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में विभिन्न अस्पतालों, जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं व्यवसायियों और और वे सभी वॉलिंटियर्स, सक्षम लोग टीबी मरीज को उनके ईलाज पूर्ण होने तक पोषाहार हेतु एडॉप्ट करने को लेकर चर्चा हुई।
जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष द्वारा 5-5 मरीजों को गोद लेने की सहमति जताई गई, जबकि जिला परिषद सदस्यों एवं प्रखंड प्रमुख द्वारा भी 2-2 मरीजों को गोद लेने की इच्छा जताई गई। मौके पर उपस्थित अमर शांति विकास संस्था एनजीओ द्वारा बताया गया कि पहले से 10 मरीजों को गोद लेने का कार्य किया गया है। साथ ही 5 और मरीजों को संस्था को आवंटित करने की इच्छा जाहिर की गई। उक्त बैठक में जिले में टीबी के मरीजों की संख्या, उनकी देखभाल व ईलाज के बारे में उपायुक्त श्री घोलप को बताया गया। वर्तमान में कुल 872 मरीज़ो में से 367 मरीजों को गोद लिए जाने की जानकारी दी गई। उपायुक्त द्वारा जिला एवं प्रखंड स्तरीय सभी पदाधिकारियों को 3-3 टीबी से पीड़ित मरीजों को गोद लेने हेतु निदेशित किया गया।
टीबी मरीज़ों को गोद लेकर उनके प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने हेतु पौष्टिक आहार के अंतर्गत निर्धारित मात्रा में चना, मूंगफली, अरहर/मसुर/मूंग/ग्राम दाल, गुड़, खाद्य तेल आदि फ़ूड बास्केट के रूप में दिए जाते हैं, जिसकी संभावित खर्च 700 रुपये प्रतिमाह 6 महीने के लिए होती है। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2025 तक टीबी से होने वाली मृत्यु को वर्ष 2015 की अपेक्षा 90% तक जबकि टीबी से ग्रसित होने वाले मरीज़ों की संख्या में 80% तक कमी लाना है।