गढ़वा: गढ़वा में एक साहब अभी बहुत व्यस्त रहते हैं। कभी-कभी तो रात 2 बजे तक उन्हें काम करना पड़ता है। काम ऐसा जो झंझट पूर्ण है। उसे त्वरित ढंगसे पूरा करना होता है और वरीय पदाधिकारियों को भी अपडेट करते रहना पड़ता है। बेचारे साहब रात्रि में सोने से पहले ईश्वर से यह मन्नत करते हैं कि कल कोई बड़ा अशुभ रिजल्ट अथवा रिपोर्ट राज्य मुख्यालय से चलकर गढ़वा की फिजाओं में तैरने न लगे। वैसे यह साहब आदमी पहचानने में माहिर है। कभी-कभी तो साहब काम करते-करते अकुता जाते हैं तो कभी रिलैक्स मूड में नजर आते हैं। कहते हैं कि मैं अपना काम कर रहा हूं। मैं क्या कर सकता इतनी गंभीर समस्या आ रही है तो यह हमारे हाथ में तो है नहीं। लेकिन कभी-कभी साहब डर जाते हैं।
Advertisement
जब मामला कोई हाई प्रोफाइल व्यक्ति से जुड़ा हो तो साहब न तो समाचार बांटते हैं और न ही किसी तरह की पुष्टि के लिए फोन पर ही उपलब्ध हो पाते हैं।
जबकि साहब का काम ऐसा इमरजेंसी वाला है कि उन्हें अपने सम्पर्क सूत्र को सदैव जीवंत रखना है। हालांकि दूर सुदूर इलाकों से सम्बंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में उन्हें तनिक भी मुश्किल नहीं होती है। लेकिन पहुंच और ऊपर तक पकड़ वाले लोगों से सम्बंधित मामलों में साहब के हाथ-पांव फूल जाते हैं। कोई कुछ पूछ न ले ऐसा सोचकर साहब अपने आप को आइसोलेशन वार्ड में कैद कर लेते हैं। ऐसी परिस्थिति में साहब कितने निडर और साहस पूर्ण तरीके से अपने कार्यों को अंजाम देते हैं यह आप समझ गए होंगे। लोग यह सोचने को विवश भी हो रहे हैं कि पहुंच वाले लोगों के सामने झुकना और फिर उठना कहीं साहब की नियति तो नहीं बन गयी है।
Advertisement
कहीं यह साहब अपने पद और प्रतिष्ठा जाने से डर तो नहीं रहे हैं। सत्ता को खुश करने के लिए कहीं उनके मन में कोई बड़ी उधेड़बुन तो नहीं चल रही है यदि ऐसा है तो लगता है साहब शायद डर गए और ऐसे डरने वाले साहब को जिले का इतना बड़ा साहब बने रहने या बनाए रहने का कोई औचित्य नहीं दिखता है।
साहब हैं तो रुतबा दिखाइए। डरिए मत। झुकिए मत। सता आती जाती है। सत्ता में आने वाले 5 साल के लिए चुने जाते हैं। लेकिन साहब जैसे लोग 60 साल के लिए चुने जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में साहब यदि डरते हैं तो पूरा प्रशासनिक महकमा डरता है और जब प्रशासन डर जाए तो आम जनता सोचने को विवश हो जाती है कि आखिर वह कौन है जिससे प्रशासन डर जाता है। सरकार के आदेशों का अनुपालन कराने वाले ऐसे साहब से किस तरह की उम्मीदें रखी जाए? उमीद है शायद साहब इसका जवाब कभी देने का साहस बटोर लें और फिर से साहसी होने का गर्व हासिल कर लें।