गढ़वा: गढ़वा जिला के कश्मीर से प्रचलित सरूअत पहाड़ सरकारी पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। आज तक इस पहाड़ पर स्थित झारखंड प्रदेश के राजस्व गांव सरूअत तक जाने के लिए झारखंड से कोई सड़क नहीं है। जिसके कारण इस गांव के छह टोला पर रहने वाले करीब 12 सौ लोगों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। सरूअत पहाड़ पारसनाथ पहाड़ के बाद झारखंड की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई 42 सौ फीट है। यह झारखंड छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित है।
क्या है खासियत :
सरूअत पहाड़ गढ़वा जिला मुख्यालय से करीब 105 किलोमीटर दूर स्थित है। जिला के बरगढ़ प्रखंड से इस गांव की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।
टेहरी पंचायत के हेसातू गांव पहुंचने के बाद सरूअत पहाड़ पर पहुंचने के लिए करीब ढाई घंटे की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इसके उपरांत सरूअत पहाड़ पर बसे गांव में पहुंचा जा सकता है। गढ़वा जिले की जून-जुलाई की गर्मी में भी सरूअत पहाड़ पर रात को कंबल ओढ़ कर सोना पड़ता है। यही कारण है कि इसे गढ़वा जिला का कश्मीर कहा जाता है। इस पहाड़ से ही सरूअत नदी का उद्गम हुआ है। यह नदी पहाड़ी से नीचे की ओर बहती है। इसी नदी का पानी यहां के ग्रामीण पीते हैं। साथ ही यही सिंचाई का भी साधन है।
मनोरम है इसकी वादियां :
सरूअत पहाड़ की वादियां काफी मनोरम हैं।
घने जंगलों के बीच करीब 15 किमी का सफर तय करने के बाद सरूअत पहाड़ की चढ़ाई शुरू होती है। पहाड़ बादलों से घिरा होता है। आपकी चढ़ाई इन बादलों के बीच से होती है। रास्ते में कई छोटे बड़े जानवर दिखाई दे जाते हैं। यह सब एक अद्भुत नजारा होता है।
छत्तीसगढ़ से अपने वाहन से भी पहुंच सकते हैं सरूअत पहाड़ पर :
सरूअत पहाड़ पर झारखंड की ओर से पहुंच मार्ग नहीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ की ओर से आप अपने वाहन से पहाड़ पर स्थित गांव तक पहुंच सकते हैं।