गढ़वा : गढ़वा जिले में सत्ता की मलाई में भागीदारी के लिए झारखंड के सत्ताधारी दल के गठबंधन में शामिल नेताओं ने झामुमो के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है।
दरअसल इसकी शुरुआत घंटाघर के उद्घाटन से जो शुरू हुआ वह रुकने का नाम नहीं ले रहा है।उस समय अपने ही मंत्री के सामने उद्घाटन समारोह में प्रवेश नहीं मिलने से नाराज कांग्रेसी धरना पर बैठ गए थे। बाद के दिनों में 20 सूत्री के गठन के साथ ही गढ़वा जिले में राजद के जिला अध्यक्ष सूरज सिंह से हुई थी, जिसकी पराकाष्ठा पिछले दिनों गढ़वा पहुंचे झारखंड सरकार के कृषि मंत्री व गढ़वा जिला बीस सूत्री प्रभारी मंत्री कांग्रेस नेता बादल पत्रलेख के गढ़वा दौरे से पहुंचा है।
उल्लेखनीय हो कि जब झारखंड में 20 सूत्री का गठन हुआ था तो गढ़वा जिला राजद के जिलाध्यक्ष सूरज कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि 20 सूत्री के गठन में राजद को अपेक्षित स्थान गढ़वा जिले में गठित बीस सूत्री कमेटी में नहीं मिला है।
राजद जिलाध्यक्ष ने इसे गठबंधन धर्म के खिलाफ बता कर पुरजोर विरोध किया था।
झारखंड के सत्ताधारी गठबंधन दल में झामुमो के खिलाफ उठे इस आवाज के बाद मंत्री बादल पत्रलेख के समक्ष बैठक में उपस्थित गढ़वा जिला कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष आशिक अंसारी का वायरल वीडियो काफी चर्चा में आ गया है। जिसमें पूर्व जिला अध्यक्ष आशिक अंसारी ने मंत्री बादल पत्रलेख के समक्ष स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में काफी छीछालेदर किया था, इस दौरान श्री अंसारी ने मंत्री बादल पत्रलेख को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए सीधा आरोप लगाया था कि गढ़वा में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी नहीं मिल पा रहा है।
पूर्व जिला अध्यक्ष आशिक अंसारी ने आरोप लगाया है कि बालू से लेकर शेड्यूल पर ठेका मैनेज में एक तरफा झामुमो की चल रही है।
अवैध बालू के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को टॉर्चर किया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ता सत्ताधारी दल के होने के बावजूद पूरी तरह से उपेक्षित है। इस दौरान आशिक अंसारी ने सत्ता में 40% कांग्रेस को भागीदारी दिलाने की बात भी मंत्री बादल पत्रलेख के समक्ष बताते हुए इसे अनुपालन कराने की बात कही थी। साथ ही चुनौती दिया था, कह दिया ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रभारी मंत्री से इस्तीफा दें।
कुल मिलाकर आशिक अंसारी का आरोप सत्ता की मलाई में कांग्रेस की भागीदारी नहीं मिलने की ओर साफ इशारा कर रहा था। श्री अंसारी ने तो सीधा स्थानीय विधायक झारखंड सरकार के पेयजल स्वच्छता मंत्री से मंत्री बादल पत्रलेख के द्वारा सांठगांठ कर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं नेताओं की उपेक्षा करने तक की बात कही है।
इस वायरल वीडियो के बाद बयानबाजी का दौर कांग्रेस तथा झामुमो की ओर से निरंतर चल रहा है।
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष आशिक अंसारी के विरोध में झामुमो नेता पूरी तरह से हमलावर हैं। झामुमो के कई नेताओं ने विधिवत पत्रकार वार्ता कर आशिक अंसारी के आरोप को न केवल खारिज किया बल्कि यहां तक आरोप लगाया है कि श्री अंसारी पूर्व विधायक के इशारे पर ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही कांग्रेस नेता आशिक अंसारी पर कांग्रेस में रहकर भी समय-समय पर चुनाव में पार्टी के साथ भितरघात करने का भी आरोप लगाया है।
इधर इस वायरल वीडियो से विपक्षी दल को भी खूब खाद पानी सत्ताधारी दल पर हमला करने के लिए मिल गया है। परिणाम है कि मंत्री के खिलाफ विपक्षी पार्टी भाजपा पूरी तरह से हमलावर है तथा सीधा भाजपा नेताओं का आरोप है कि गढ़वा जिले में गठबंधन सरकार के द्वारा सत्ता की मलाई के लिए सारे नियम कानून को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है।
वैसे भी कॉन्ग्रेस खेमे में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है कि झामुमो की ओर से गठबंधन धर्म का पालन न कर कांग्रेस के नेताओं को झामुमो में शामिल करा कर पार्टी को कमजोर करने की साजिश रची जा रहा है।
इस क्रम में पिछले दिनों कांग्रेस से झामुमो में शामिल कराए गए गढ़वा जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कमर सफदर तथा युवा कांग्रेस के राजेश चौबे का नाम सुर्खियों में इस आरोप-प्रत्यारोप के दौर में आ गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि झारखंड में गठबंधन की सरकार चल रही है जिसमें कॉन्ग्रेस एक बड़ा पार्टनर है बावजूद कांग्रेस को मजबूत करने के बजाए उसे कमजोर करना कहीं से भी गठबंधन धर्म के अनुकूल झामुमो का व्यवहार नहीं है।
कुल मिलाकर गढ़वा जिले में सत्ताधारी दल के बीच चल रही खींचतान में बालू का अवैध कारोबार तथा टेंडर मैनेज का मुद्दा उभर कर सामने आया है। लिहाजा स्थिति यह बन गई है कि झारखंड में चल रही गठबंधन सरकार को गढ़वा में विपक्ष की आलोचना की जरूरत नहीं है। खुद गठबंधन में शामिल नेताओं के बीच ही आपस में ही जूतम पैजार निरंतर जारी है, जिसका आने वाले समय में सुखद परिणाम की अपेक्षा नहीं रखा जा सकता है।