गढ़वा :
झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला कार्यालय में झामुमो नेताओं ने प्रेस वार्ता आयोजित कर कांग्रेस के कुछ नेताओं पर सीधा हमला बोला है। विगत दिनों झामुमो में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कमर सफदर ने कहा कि कुछ लोग कांग्रेस में रहकर उसे खोखला करने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों की करतूतों से क्षुब्ध होकर ही हमने कांग्रेस का दामन छोड़ा था। उन्होंने कहा कि 2018 में जब वह नगर परिषद अध्यक्ष पद से चुनाव लड़ रहीं थी तो कांग्रेस के इन्हीं नेताओं ने उन्हें चुनाव हराने का काम किया तथा चुनाव प्रचार हेतु पैसे की मांग की थी। ऐसे लोग कांग्रेस को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।
कांग्रेस के टिकट पर नगर परिषद के उपाध्यक्ष प्रत्याशी रहे वर्तमान झामुमो नेता राजेश चौबे ने कहा कि ऐसे लोग से कांग्रेस को ही नुकसान होगा।
यह सारा घटनाक्रम मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के छवि को खराब करने के लिए पूर्व विधायक के इशारे पर किया जा रहा है। कांग्रेस के गुटबाजी से परेशान होकर ही हमने पार्टी को छोड़ दिया। कांग्रेस के हितैषी लोग जो कांग्रेस को खड़ा करने का प्रयास करते थे और जब वहां जमीन इनकी दाल नहीं गलती थी तो ऐसे लोग अपने ही पार्टी के इमानदार और वफादार नेताओं के खिलाफ बगावत कर उनका विरोध करने का काम करते थे। इसी का परिणाम है कि कांग्रेस दिन प्रतिदिन कमजोर होते जा रही है और ऐसे लोग जब तक रहेंगे कांग्रेस का यही हाल बना रहेगा।
जिला प्रवक्ता धीरज दुबे ने कहा कि सच्चे कांग्रेसी आज भी गठबंधन सरकार के साथ हैं परन्तु कुछ तथाकथित लोग जो खुद को कांग्रेसी कहते हैं परंतु असल में यह बाहरूपिये हैं।
ऐसे लोग भाजपा के पूर्व विधायक के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। भाजपा की सत्ता में यह लोग पूर्व विधायक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना व्यक्तिगत हित साधते थे। कांग्रेस में रहते हुए भी ऐसे लोग विपरीत विचारधारा के नेताओं को लाभ पहुंचाने का काम किया। चुनाव के समय भी यह गठबंधन धर्म से विपरीत जाकर भाजपा प्रत्याशी का समर्थन एवं प्रचार में लगे हुए थे और यह जगजाहिर है। सत्ता में निजि लाभ के लिए यह बाहरूपिये कांग्रेस की बैनर का इस्तेमाल करना चाहते है। और जब इनका दाल नहीं गल रहा है तो यह झूठा आरोप लगाने का काम कर रहे हैं।
इनका बाहरूपिया होने की बात इससे भी प्रमाणित होता है कि अपने ही पार्टी के माननीय मंत्री को खुले मंच से बेइज्जत करते हुए उनका वीडियो वायरल किया जा रहा है।
अगर वह पार्टी के सच्चे सिपाही होते तो बंद कमरे में अपनी बात को रखते। इस तरह से सरेआम अनुशासनहीनता का परिचय नहीं देते। यह घटना कांग्रेस पार्टी के लिए आत्ममंथन एवं चिंतन करने का विषय है।