रंका :
गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंका में शुक्रवार को लगभग 16 महिलाओं को सफल बंध्याकरण चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर रामाशीष चौधरी के द्वारा किया गया था जो दूसरे दिन सुबह डिस्चार्ज के समय मरीज का आरोप है कि अस्पताल से दवा नहीं मिला वही कुछ मरीजों का कहना है कि सहिया के डायरेक्शन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंका के सामने स्थित एक दवा दुकान से दवा लेने की सलाह दी गई वही गरीब मरीजों से दवा दुकानदार के द्वारा हर मरीज के 500 से 1000 रुपये तक का दवा खरीदने को मजबूर किया जाता है।।
वहीं डॉ राम आशीष चौधरी ने बताया कि मेरे द्वारा 3 दवा मात्र 1 मरीज को लिखा गया था लेकिन अगर उसके अलावा बिना आवश्यकता का दवा दी गई है तो उसमें मेरी कोई गलती नहीं है।
साथ ही दवा की लिखी हुई पर्चा से हटकर भी दवा देने का मामला सामने आई है।गौरतलब है कि रंका हॉस्पिटल में जब भी बंध्याकरण किया जाता है तो सहियाओं के द्वारा बहला फुसला कर इसी तरह का कारनामा देख देखने को मिल जाता है इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ गोपाल प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सारी दवाइयां हॉस्पिटल में उपलब्ध है अगर ऐसी मामला है तो मैं पता लगाता हूं वही गढ़वा जिला का सिविल सर्जन डॉ कमलेश कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच की जाएगी वही रंका अनुमंडल पदाधिकारी राम नारायण सिंह ने भी मामले की जांच करने की बात कही है अब देखने वाली बात यह होगी कि कब तक आम गरीब जनता से इस तरह का दोहन शोषण का कार्य किया जाता रहेगा? वैसे में ऐसे कारनामा करने व करवाने वाले लोगों पर कार्यवाही करने की जरूरत है वहीं झारखण्ड सरकार ने पहले ही बता दिया है कि बंध्याकरण कराने वाले मरीजों की डिस्चार्ज के बाद मिलने वाली सारी दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध रहती है।
वैसे में भी सवाल खड़ा होता है कि आखिर दवाई रहते मरीज को दवा क्यों नहीं दी जाती है अगर दी जाती है तो बाहर की दवाइयों की लेने की जरूरत क्यों पड़ती है ऐसे में तो अब जांच का ही मामला है जांच में क्या सही निकल कर सामने आता है देखने वाली बात होगी।