रेहला :
सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में शुक्रवार को विश्रामपुर प्रखंड मुख्यालय पर मनरेगा कर्मियों के द्वारा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता बीपीओ मनरेगा चंद्रशेखर कुमार व संचालन संघ के विश्रामपुर प्रखंड अध्यक्ष मनोज चौबे ने की।
धरना पर बैठे सभी कर्मियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मनरेगा कर्मी वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्य करते रहे हैं। जिससे परिवार का भरण पोषण भी नहीं हो पा रहा। ना ही सरकार की ओर से नौकरी सुरक्षा की गारंटी दी गई है। सरकार के द्वारा मनरेगा की अलावे अन्य कार्य कराई जाती है। जिसका शिकार भी बनाया जाता है। बदले में कर्मियों को मानदेय के अलावा अन्य किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही।
कभी भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है। कर्मियों ने कहा कि दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में बीमा या किसी भी प्रकार की मुआवजा का प्रावधान भी नहीं है , ऐसे में सरकार के द्वारा मनरेगा कर्मियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। कहां कि विवश होकर मनरेगा कर्मियों के द्वारा सरकार की दमनकारी नीति, वादा खिलाफी व हठ धर्मिता के विरोध में अपनी मांगों के समर्थन में चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया। जिसमें रोजगार सेवक, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता व प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी आदि ने बढ़ चढ़कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित की। साथ ही सरकार की नीति के विरोध आगे भी बढ़-चढ़कर चरणबद्ध आंदोलन करने की अपनी संकल्प को दुहराया।
मौके पर बीपीओ चंद्रशेखर कुमार, कनीय अभियंता मिनहाज आलम, रोजगार सेवक अरुण सिंह, अनिकेत दुबे, गुलाम सरवर, लालदेव राम सहित अन्य मनरेगा कर्मचारी उपस्थित थे।
मनरेगा कर्मियों के द्वारा मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री के नाम विश्रामपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें सेवा शर्त नियमावली 2007 में संशोधन की मांग की है। जो मनरेगा कर्मचारी महासभा कर्मियों की उपस्थिति में इसका संशोधन हो। झारखंड के सभी मनरेगा कर्मियों को स्थाई किया जाए। स्थाई होने तक पद व कोटि के अनुरूप वेतनमान के बराबर मानदेय का भुगतान हो, सभी प्रकार की भत्ता का लाभ मिले, प्रत्येक वर्ष वेतन में 10% की बढ़ोतरी हो, वेतनमान प्रशासनिक मद से न कराते हुए राज्य सरकार द्वारा वेतन शीर्ष का गठन कर भुगतान किया जाए।
सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभ मनरेगा कर्मियों को भी मिले हैं। दिवंगत कर्मियों को 25 लाख रुपए की मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी, 50 लाख रुपए की जीवन बीमा, 5 लाख रुपए की स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व-पितृत्व अवकाश जैसी अन्य कर्मियों को मिलने वाली सुविधाएं भी मिले। बर्खास्त कर्मियों के लिए अपीलीय प्राधिकार प्रमंडलीय आयुक्त अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए सेवा में वापस लिया जाए। सरकारी नियुक्ति में आरक्षण व उम्र सीमा का लाभ व ईपीएफ कटौती लागू हो।