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केतार : गढ़वा जिले के केतार प्रखंड में झारखंड के सीमांत पर स्थित नारायण वन का सूर्य मंदिर श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां पर छठ व्रत करने वाली महिला श्रद्धालुओं की गोद भगवान भास्कर अवश्य भरते हैं। लिहाजा यहां कार्तिक तथा छठ के मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु छठ पूजा करने पहुंचते हैं तथा भक्त मेला लगता है। उक्त मंदिर का सौंदर्यीकरण का कार्य मंदिर निर्माण समिति द्वारा करा कर उसका भव्य स्वरूप देने की प्रक्रिया आने वाले कार्तिक मेले से पहले पूर्ण करने की तैयारी मंदिर समिति द्वारा निरंतर किया जा रहा है
दरअसल पहाड़ की तलहटी में स्थित नारायण वन अपने आप में प्रकृति का अनुपम उपहार है जहां पर पर्वत से निकला सदाबह जलप्रपातनुमा सरोवर है जो आगे जाकर नदी का रूप ले लेता है।
इसकी खासियत है कि किसी भी मौसम में सूखता नहीं है। गर्मी के दिनों में भी इस सरोवर में शीतल पीने लायक शुद्ध पेयजल उपलब्ध रहता है।
नारायण वन के नामकरण तथा सूर्य मंदिर को ले एक किवदंती है इसके अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व बगल के गांव सिंहपुर में यज्ञ करा रहे कृष्णनन्द ब्राह्मचारीजी को यज्ञ पुर्णाहुति के रात में स्वप्न आया कि मुकुन्दपुर गांव के उस करम का पेड़ जिस स्थान को भुतगढ़वा नाला के नाम से जाना जाता है, जो वर्तमान में भी बिराजमान हैं वहां भगवान सूर्य नाले के अन्दर दबे हैं। ब्रह्मचारी को स्वप्न में श्री भगवान ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुझे बाहर निकाल कर स्थापित करो और ईस जगह का नाम नरायण वन रखो, ब्रह्मचारी ने सुबह इसकी सूचना गांव वालों की दी सूचना मिलते ही सभी गांव के लोग भुतगड़वा मुकुन्दपुर गाजे बाजे के साथ गए तथा वहां से लौटकर मंदिर की स्थापना किया गया।
उसी साल से कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्टि चैत शुक्लपक्ष छठ व्रत होते आ रहा है। छठ मेले में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार झारखंड अन्य राज्यों से छठ व्रतधारी अपने अपने मनोकामना लेकर आते हैं पूर्ण होती है, विशेषकर इस स्थान को लेकर मान्यता है कि संतान ही महिला यदि यहां भक्ति भाव से छठ व्रत करती है तो छठ मैइया उसकी गोद अवश्य भरती हैं।
पिछले कुछ वर्षों से उक्त मंदिर के सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। मंदिर निमार्ण समिति के अध्यक्ष उमाशंकर चौबे, उपाध्यक्ष दीपक वर्मा, सचिव बिनोद गप्ता, मुना चौबे, श्रीकांत ठाकुर ने बताया कि यहां भव्य मंदिर का स्वरूप का कार्य जो चल रहा है उसे कार्तिक के छठ मेले से पूर्व पूर्ण करने की कोशिश किया जा रहा है।