भवनाथपुर : प्रखंड के अरसली उत्तरी पंचायत का आदिम जनजाति बहुल टोला लहराहा में आजादी के 73 वर्ष व पंचायती राज्य के दस वर्ष बीतने के बावजूद विकास से कोसों दूर है। गांव में सरकारी योजनाओं में तो लाखों खर्च उक्त टोला में किया गया, परंतु समुचित लाभ वहाँ के लोगों को नहीं मिला। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उक्त गांव में जाने के लिए एक कच्ची सड़क का निर्माण मनरेगा योजना से बीते वर्ष 2019 से चल रहा है, परंतु तीन वर्ष बीतने के बावजूद मुख्य सड़क आज तक अधूरा है। जिसके कारण बीमारी या अन्य आवश्यक कार्य से आने जाने के लिए साइकिल व डोली ही सहारा है।
सरकारी योजनाओं की बात करें तो गांव में वर्ष 2016 में विधायक भानु प्रताप शाही के द्वारा ट्रांसफार्मर का उदघाटन किया गया था, परंतु नौ माह में ही ट्रांसफार्मर खराब हो गई।
ग्रामीणों के द्वारा सूचना के बावजूद अभी तक खराब पड़ा है।चार हैंड पम्प में दो खराब है। गांव में बने दो वर्ष पूर्व लाखों रु की लागत से ग्रामीण सुविधा केंद्र भवन हाथी का दांत साबित हो रहा है। इन दस वर्षों में तो मनरेगा व अन्य मद से दर्जनों सरकारी योजना कार्यान्वित हुई, मगर सभी अनुपयोगी ही साबित हो रही है।
ग्रामीण रामप्रीत कोरवाज़ अनुज कोरवा, सुरेंद्र, अमरिका, बरती देवी, सुबचनी देवी, परिखा, महेंद्र, रेखा देवी, गणेश, शांति देवी, सविता देवी, मोहन कोरवा ने बताया कि हमलोग गांव के मुखिया, व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई अन्य जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण का मांग रखा पर। अभी तक लाखों रु खर्च होने के बावजूद सड़क से महरूम हैं।
गांव में कोई स्वास्थ सुविधा, आंगन बाड़ीज़ पेयजल, मनरेगा योजना, कृषि लोन का लाभ नहीं मिला है। महिला रोजगार से जुड़ कर विकाश करना चाहती हैं, परंतु कोई भी अधिकारी पदाधिकारी या जनप्रतिनधियों का सहयोग हमलोगों को प्राप्त नहीं हो पाया। गांव में 90 प्रतिशत लोग अभी भी अशिक्षित हैं, जिसके कारण विकाश से हम सब कोसों दूर हैं।
बताते चलें की भवनाथपुर प्रखंड मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूरी पर सेल के आवासीय परिसर होते उक्त टोले में लगभग 40 घरों की 250 आबादी के आदिम जनजाति के लोग निवास करते हैं, जिनकी आजीविका जंगल से सूखी लकड़ी व दातुन बेचकर अपना परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं।