गढ़वा : कला एवं समाज सेवा के प्रति समर्पित संस्था पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच के द्वारा नाट्यशास्त्र के प्रणेता आचार्य भरतमुनि की जयंती के शुभ अवसर पर अपने सोलह वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम का आयोजन गढ़वा क्लासेज में किया गया।
"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा।।" से प्रारम्भ हुए इस आयोजन में उपस्थित जनों के द्वारा नाट्यशास्त्र के प्रणेता आचार्य भरतमुनि के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन किया गया।
इस अवसर पर विषय प्रवेश कराते हुए पंडित हर्ष द्विवेदी का मंच के निदेशक नीरज श्रीधर 'स्वर्गीय' ने कहा कि सभी लोगों का स्नेह और सहयोग से पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच स्थापना काल से ही कला के विभिन्न आयामों के माध्यम से अपने ध्येय वाक्य "जन जन हों जागरूक बने स्वर्ग यह जग सारा।
रहे न कोई वंचित है शाश्वत संकल्प हमारा।।" को चरितार्थ करने में निरंतर गतिमान है।
मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित सेवानिवृत्त आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एल. एम. मिश्र ने कहा कि आचार्य भरतमुनि का कृत्य संपूर्ण सृष्टि के लिए अनुकरणीय और वंदनीय है। पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच के द्वारा प्रारंभ किए गए "झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई सम्मान" अत्यंत ही प्रशंसनीय है।यह सम्मान प्रत्येक वर्ष एक ऐसी नारी शक्ति को प्रदान किया जाता है जिनका कृत्य समस्त नारियों के लिए प्रेरणादायक हो। गढ़वा ज़िले में एकमात्र पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच द्वारा चलाए जा रहे नाट्य प्रशिक्षण की नियमित कक्षाओं में भी उत्कृष्ट रूप से नाट्य कला की समस्त बारीकियों को सिखलाया जाना प्रशंसनीय कार्य है।
विशिष्ट अतिथि नगर परिषद गढ़वा के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि अपनी रचना और सक्रियता के माध्यम से आचार्य भरतमुनि जी ने जो दिया है वह संपूर्ण विश्व के लिए अद्वितीय है। झारखंड की प्रथम शौर्य चक्र विजेता शहीद आशीष कुमार तिवारी पर उपलब्ध वृत्तचित्र बनाकर पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच ने उनके प्रति जो श्रद्धांजलि व्यक्त की है वह वास्तव में उत्कृष्ट कार्य है।
इस मौके पर विकास कुमार, शिक्षक राजेश कुमार मिश्र, डॉक्टर शंभू कुमार तिवारी, अरविंद कुमार तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए जब भी ज्योतिषी श्याम नारायण पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस आयोजन में रंगकर्मी शुभेन्द्र द्विवेदी, विजय शर्मा आदि उपस्थित थे कार्यक्रम का समापन "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुखभागभवेत्।
। ऊँ शान्तिः शान्तिः शांतिः।।।" के साथ हुआ।