गढ़वा : उत्पाद अधीक्षक सुजीत कुमार को मिली गुप्त सूचना के आधार पर उत्पाद विभाग की टीम व मेराल पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाते हुए मेराल थाना क्षेत्र के रजबन्धा गांव में अवैध रूप से संचालित हो रहे विदेशी दारू फैक्ट्री का उद्भेदन करते हुए फैक्ट्री का मैनेजर रजबन्धा गांव निवासी राजबली भुइयाँ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जबकि फैक्ट्री में प्रयुक्त लगे मशीनरी सहित अन्य सामानों को जप्त कर उत्पाद विभाग की टीम ने गढ़वा ले आई है।
उक्त जानकारी आज समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में उत्पाद अधीक्षक सुजीत कुमार ने पत्रकार वार्ता कर दी है उन्होंने बताया कि रजबंधा गांव में रॉयल स्टैग का नकली टैग लगा कर विदेशी शराब को तैयार किया जाता था यहां से भारी मात्रा में तैयार की गई नकली शराब, अर्ध निर्मित शराब शराब बनाने के उपकरण 6 बड़ा बड़ा गैलन, झारखंड उत्पाद विभाग का नकली लोगों सहित अन्य सामान बरामद किया गया है जिसकी कुल लागत बाजार मूल्य में करीब पचास लाख की है।
उन्होंने बताया कि यह शराब फैक्ट्री गांव से 500 मीटर की दूरी पर है विदेशी शराब की नकली फैक्ट्री सुदूरवर्ती इलाके में पहाड़ी पर चलायी जा रही थी। उत्पात विभाग और मेराल पुलिस ने संयुक्त रूप से यहां गुप्त सूचना पर कार्रवाई की. फैक्ट्री में नकली रॉयल स्टैग की शराब तैयार की जा रही थी।
मौके से रॉयल स्टैग का हाफ 210 पेटी, खाली पेटी 180 और 24 ड्रम स्प्रिट बरामद किया गया है। उत्पाद अधीक्षक सुजीत कुमार ने बताया कि यह अवैध नकली शराब फैक्ट्री रजबंधा गांव के निवासी सुदर्शन सिंह के पुत्र प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू सिंह का है। जब उसे उत्पाद विभाग टीम का छापेमारी की सूचना मिली तो वह मौके से फरार हो गया। उत्पाद अधीक्षक ने बताया कि जिले में पहली बार इतनी बड़ी अवैध नकली शराब फैक्ट्री का उद्भेदन किया गया है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर यह शराब फैक्ट्री से नकली शराब दूसरी जगह जाता तो शराब पीने वालों की जान माल की हानि भी हो सकती थी। उन्होंने बताया कि इस फैक्ट्री से निकलने वाले शराब को होली पर्व में बेचने तथा बिहार, यूपी और छत्तीसगढ़ भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है यह शराब बहुत ही जहरीला शराब होता है। इस नकली विदेशी शराब को बनाने के लिए झारखंड राज्य के बाहर से कारीगर की आने की संभावना है उन्होंने बताया कि सूचना के अनुसार गढ़वा से भी 5-6 लेबर रात्रि में काम करने वहां जाया करते थे।
बता दें अवैध शराब फैक्ट्री ऐसा जगह पर स्थापित किया गया था जहां क्षेत्र के भविष्य यानी छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने जाते थे।
अवैध नकली शराब फैक्ट्री के बगल में ही सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं, जबकि उसके बगल में एक ईट भट्ठा भी है और उस भट्टे पर करीब सैकड़ों मजदूर कार्य करते हैं लेकिन अवैध शराब फैक्ट्री में इतने सुनियोजित तरीके से कार्य होते थे कि किसी को भनक नहीं लगती थी। शराब बनाने के कार्य रात्रि 10:00 बजे से शुरू होता था जो रात भर चलता था।