गढ़वा : झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने जिला कार्यालय में प्रेसवार्ता कर भाजपा पर हमला बोला। झामुमो जिलाध्यक्ष तनवीर आलम खान ने कहा कि सच्चाई उजागर होते ही भाजपा जिलाध्यक्ष मुंह छुपा लिए और छुटभैये नेता को आगेकर अनर्गल बयानबाजी करवा रहे हैं। अगर मेरे आरोपों में दम नहीं होता तो वह खुद बैठकर सफाई पेश कर रहे होते। भाजपा जिलाध्यक्ष पर दिए गए बयान हवा-हवाई नहीं बल्कि प्रमाण के साथ मीडिया के सामने प्रस्तुत किया गया था जो सच है और जल्द ही सारे मामलों पर करवाई प्रारंभ कराई जाएगी। भाजपा अध्यक्ष पर आरोप उजागर होते ही छुटभैये नेता बिलबिला कर अनाप-शनाप बोल रहे है। झामुमो जिलाध्यक्ष ने कहा कि वह जमात का नेतृत्व करते हैं उन्हें किसी के पीछे चलने की आवश्यकता नहीं बल्कि मेरे विचारधारा, पार्टी के सिद्धांत और कर्मठता के कारण लोग हमारे पीछे चलते है।
जब पूर्व विधायक ने अपना विचारधारा बदल दिया तो उन्हें मजबूरन हमारे पीछे से हटना पड़ा। हम कट्टरवाद नहीं बल्कि सर्वधर्म समभाव की राजनीति में विश्वास रखते हैं। 5 साल सूबे में भाजपा की सरकार रही अगर राज्य के मुख्यमंत्री पर किसी तरह के आरोप में दम होता तो भाजपा सरकार अभी तक जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी कर देती। परंतु भाजपा के लोग अफवाह फैलाने और गुमराह की राजनीति करने में माहिर है इसलिए हवा-हवाई बयानबाजी इनका पेशा बनता चला जा रहा है। यही कारण है कि विगत चुनाव में राज्य की जनता ने भाजपा को नकारकर राज्यहित में सोचने वाली पार्टी और उसके नेता को चुनने का काम किया।
जिला सचिव मनोज ठाकुर ने कहा कि झूठ-फरेब की राजनीति सीखना हो तो भाजपा की पाठशाला में जाना पड़ता है।
यह छुटभैये नेता वही के विद्यार्थी हैं। पालतू तोता की तरह जो वहां सिखाया जाता है वहीं यह बयानबाजी करते है। भाजपा को अपने जनाधार पर इतना विश्वास होता तो 2014-19 के विधानसभा चुनाव में दूसरे पार्टी के विधायकों को अपने टिकट पर चुनाव लड़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। पलामू प्रमंडल में कोई भी विधायक उनके अपनी पार्टी का नहीं है। मंत्री मिथिलेश ठाकुर का चरित्र प्रमाणपत्र देने की जरूरत भाजपा नेताओं को नहीं है बल्कि विगत चुनाव में जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाकर भाजपा को मुँहतोड़ जवाब दिया है।
जिला प्रवक्ता धीरज दुबे ने कहा कि भाजपा किसान मोर्चा के लोग पहले केंद्र में बैठे अपने नेताओं को नसीहत देने का काम करें। जो देश के किसानों को गुलाम बनाने पर तुले हुए हैं।
केंद्र की भाजपा सरकार अडानी-अंबानी एवं पूंजीपतियों के हाथों बिक चुकी है। अब देश को पूंजीपतियों के इशारे पर चलाया जा रहा हैं। सभी सरकारी संस्थाओं को निजी व्यापारियों के हाथों बेच कर भाजपा की केंद्र सरकार सूकून से सत्ता का आनंद ले रही है। जबकि देश की आम जनता बढ़ती महंगाई और जन विरोधी कानूनों से परेशान होकर सड़कों पर बैठी है। दिल्ली सीमाओं पर कई महीनों से डटे किसानों के प्रति सहानुभूति पूर्वक विचार ना करते हुए केंद्र के भाजपा नेता चुनावी रैली करने में मशगूल है। इनकी राजनीति आम जनता के हितों की बजाय चुनाव, सत्ता, भेद-भाव एवं पूंजीपतियों तक ही सीमित रह गई है।