खरौंधी : गढ़वा जिला उपप्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष गोरखनाथ चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को कार्य विस्तार देकर जिसे राज्य के तमाम पंचायत प्रतिनिधियों को नव वर्ष का तोहफा बता रही है, वह आधे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ धोखा है।
उन्होंने इस कार्य विस्तार में उप मुखिया, उप प्रमुख और जिला परिषद के उपाध्यक्ष को शामिल नहीं करने पर नाराजगी प्रकट करते हुए अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतों के विघटन के पश्चात राज्य सरकार कार्यकारी व्यवस्था के तहत पंचायतों के तीनों स्तर पर मुखिया, प्रमुख व जिला परिषद के अध्यक्ष को उक्त स्तर पर अध्यक्षीय कार्य विस्तार देकर व उनसे संबंधित कमेटी के सदस्यों को कार्यकारी समिति के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका तयकर अपनी खूब वाहबाही तो लूट रही है।
लेकिन पंचायत के तीनों ही स्तर पर उप मुखिया, उप प्रमुख और जिला परिषद के उपाध्यक्ष के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं कर इस प्रकार के पंचायत प्रतिनिधियों का अपमान कर रही है। जिसे राज्य के तमाम उपमुखिया, उपप्रमुख व जिला परिषद के उपाध्यक्ष कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होने कहा कि इससे राज्य भर के उप मुखिया, उप प्रमुख और जिला परिषद के उपाध्यक्ष सभी लोग सरकार की इस उपेक्षापूर्ण एवं दोरंगी नीति से आहत हैं। राज्य के सभी उप मुखिया, उपप्रमुख और जिला परिषद के उपाध्यक्ष सरकार के इस दोहरे मापदंड का कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के बीच इस प्रकार के भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाकर पंचायत प्रतिनिधियों के बीच फूट डालने का कुत्सित प्रयास कर रही है।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि मुखिया, प्रमुख जिला परिषद के चेयरमैन व उनसे संबंधित तीनों स्तर की कमेटी के सदस्यों के कार्य विस्तार और भूमिका के संबंध में सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था का वे स्वागत करते हैं। लेकिन इस वैकल्पिक व्यवस्था में राज्य के तमाम उप मुखियाओं, उपप्रमुखों और जिला परिषद के उपाध्यक्ष को भी शामिल कर उनके कार्य वह भूमिका तय की जानी चाहिए। अगर सरकार इस दिशा में इस जनवरी माह में कोई फैसला नहीं लेती है तो राज्य के तमाम उप मुखिया, उप प्रमुख और जिला परिषद उपाध्यक्ष के साथ सरकार के विरुद्ध चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक की अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की तरह अधिकार एवं भूमिका हम पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी राज्य सरकार तय नहीं कर देती।
उन्होंने कहा कि सरकार की इस भेदभाव पूर्ण रवैया के विरूद्ध वह लोग न्यायालय में पीआईएल दाखिल कर भी न्याय की मांग करेंगे।